
रामकृष्ण मठ द्वारा पारंपरिक विधि-विधान से हुआ माँ का विसर्जन
लखनऊ. रामकृष्ण मठ, निराला नगर, लखनऊ में 16 अक्टूबर 2026 से चल रहे श्री श्री दुर्गा पूजा के छठे एवं अंतिम दिन बुधवार 21 अक्टूबर को विविध धार्मिक अनुष्ठानों, भक्तिगीतों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच माँ दुर्गा की विदाई सम्पन्न हुई। इस अवसर पर उपस्थित भक्तगण भक्ति, श्रद्धा एवं उल्लास से सराबोर रहे।
दिन का शुभारम्भ प्रातः 5 बजे शहनाई की मंगलध्वनि एवं माँ दुर्गा की मंगल आरती के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चारण एवं दुर्गा स्तुति की गई। इसके पश्चात प्रातः 7 बजे दशमी पूजा का विधिवत शुभारम्भ हुआ।
पुष्पांजलि के पश्चात दर्पण विसर्जन सम्पन्न हुआ। मठ के संन्यासियों एवं ब्रह्मचारियों ने माँ श्री श्री दुर्गा की प्रतिमा की परिक्रमा की। इसके बाद माँ का सांकेतिक विसर्जन किया गया। इस अनुष्ठान का आध्यात्मिक संदेश है कि मनुष्य अपने भीतर की आसुरी प्रवृत्तियों का त्याग कर सद्गुणों, पवित्रता एवं आध्यात्मिक चेतना को अपनाए।
दोपहर माँ की प्रतिमा को पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार विदाई देने का अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। रामकृष्ण मठ के ब्रह्मचारी सौम्यजीत ने माँ की पूजा एवं आरती की तथा मिष्ठान्न आदि अर्पित कर माँ को भावपूर्ण विदाई दी।
इसके पश्चात सुहागिन महिलाओं ने माँ को सिंदूर अर्पित किया तथा एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सिंदूर उत्सव मनाया। इस दौरान महिलाओं ने माँ से अगले वर्ष पुनः पधारने की प्रार्थना की। पूरे पंडाल में श्रद्धा, विश्वास एवं उल्लास का अनुपम दृश्य देखने को मिला। माँ के प्रति भक्तों की अटूट आस्था एवं भावपूर्ण विदाई ने वातावरण को भावविभोर कर दिया।
अपराह्न 2ः30 बजे माँ की प्रतिमा की विसर्जन यात्रा प्रारम्भ हुई। फूल-मालाओं से सजे वाहन पर माँ की प्रतिमा को विराजमान किया गया। मठ परिसर में उपस्थित भक्तों ने माँ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात श्रीमत् स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज के नेतृत्व में संन्यासियों, ब्रह्मचारियों एवं भक्तों का काफिला रामकृष्ण मठ, लखनऊ से लगभग 25 किलोमीटर दूर ग्राम बक्कास, जिला लखनऊ में मठ की निजी संपत्ति पर स्थित तालाब के लिए रवाना हुआ।
विसर्जन यात्रा रामकृष्ण मठ, निराला नगर से प्रारम्भ होकर विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक, आईटी चौराहा, हनुमान सेतु, बंधा रोड, निशातगंज पुल, भैसाकुंड, 1090 चौराहा एवं लोरेटो स्कूल होते हुए सोमनाथ द्वार पहुँची। वहाँ से सुल्तानपुर रोड होते हुए ग्राम बक्कास स्थित विसर्जन स्थल तक यात्रा पहुँची। पूरे मार्ग में भक्तगण उत्साह एवं हर्षाेल्लास के साथ माँ के जयकारे लगाते रहे।
विसर्जन स्थल पर स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज एवं अन्य भक्तों ने माँ की प्रतिमा के समक्ष तालबद्ध धुनुची नृत्य प्रस्तुत किया। इसके पश्चात पारंपरिक विधि से माँ की प्रतिमा का विसर्जन तालाब के स्वच्छ एवं निर्मल जल में किया गया। उपस्थित भक्तों के बीच बूंदी प्रसाद वितरित किया गया। विसर्जन के बाद मठ लौटने पर भक्तों के मध्य शांतिजल एवं मिठाई का प्रसाद वितरित किया गया।
प्रतिमा विसर्जन के संबंध में रामकृष्ण मठ, लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज ने बताया कि गोमती नदी में पहले से ही प्रदूषण की समस्या है। ऐसे में माँ की प्रतिमा का विसर्जन नदी के दूषित जल में करना उचित नहीं है। इसी पर्यावरणीय एवं धार्मिक भावना को ध्यान में रखते हुए मठ ने गोमती नदी के स्थान पर ग्राम बक्कास, जिला लखनऊ स्थित अपनी निजी संपत्ति पर निर्मित तालाब में माँ की प्रतिमा का विसर्जन करने का निर्णय लिया। यह पहल धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ-साथ नदी के पर्यावरण संरक्षण के प्रति मठ की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
इस प्रकार छह दिवसीय श्री श्री दुर्गा पूजा का समापन श्रद्धा, भक्ति, आध्यात्मिक संदेश एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता के साथ हुआ।



