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मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों के लिए आवश्यक : डॉ. विजय वीर सिंह

2 दिवसीय किसान प्रशिक्षण आयोजित

बयाना।भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान सेवर के निदेशक डॉ. विजय वीर सिंह ने 12-13 मई 2026 तक आयोजित दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध एवं असंतुलित प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता क्षमता में लगातार कमी आ रही है। मृदा में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी के कारण फसलों के उत्पादन एवं गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे उत्पादन में स्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से खेत की मिट्टी में उपलब्ध नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, जैविक कार्बन तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है। इसके आधार पर किसान यह समझ सकते हैं कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी या अधिकता है तथा उसी अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग कर सकते हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है तथा फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि होती है। साथ ही उन्होंने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग को अपनाने की सलाह दी, ताकि मृदा स्वास्थ्य लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

कार्यक्रम के प्रशिक्षण समन्वयक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अशोक शर्मा ने कहा कि वर्तमान कृषि परिदृश्य में किसानों की आय बढ़ाने एवं संसाधनों के कुशल उपयोग के लिए पारंपरिक खेती के साथ समेकित कृषि प्रणाली अपनाना आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को कृषि एवं बागवानी फसलों की वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों, उन्नत फसल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा आधुनिक कृषि पद्धतियों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।

यह कार्यक्रम जलसंसाधन विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा प्रायोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. रामस्वरूप जाट, डॉ. हरवीर सिंह, डॉ. मुरलीधर मीणा, डॉ. राजकुमार योगी, डॉ. उदयभान सिंह एवं श्री वीरेश भगौर द्वारा किसानों को उन्नत शस्य क्रियाओं, राई–सरसों की उन्नत किस्मों, मिट्टी परीक्षण, बागवानी फसलों के प्रबंधन, जैविक खेती तथा एकीकृत कृषि प्रणाली के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। किसानों ने संस्थान की कृषि मशीनरी, तेल एवं बीज प्रसंस्करण इकाइयों, संग्रहालय एवं प्रक्षेत्र फार्म का भ्रमण कर व्यावहारिक जानकारी भी प्राप्त की।

समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा कार्यक्रम का समन्वय डॉ. अशोक शर्मा द्वारा किया गया।

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