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अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं थे पैसे, मानवता बनकर पहुंचा आष्टा युवा संगठन

एमपी छत्तीसगढ़ डिप्टी स्टेट हेड जितेंद्र राठौर पहलवान की रिपोर्ट

महिला की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, संगठन ने उठाया अंतिम संस्कार का पूरा खर्च; एक माह का राशन देकर निभाया सामाजिक दायित्व

आष्टा। बीमारी के चलते इंद्रा कॉलोनी वार्ड क्रमांक 15 निवासी करीब 40 वर्षीय शोभा बाई नाथ का निधन हो गया। अचानक हुई इस दुखद घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। ऐसे में शोभा बाई के निधन के बाद परिवार के सामने अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना भी बड़ी चुनौती बन गया।

दुख की इस घड़ी में आष्टा युवा संगठन परिवार के लिए सहारा बनकर आगे आया। संगठन ने न केवल अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था का खर्च उठाया, बल्कि परिवार को एक माह का आवश्यक राशन भी उपलब्ध कराया।

आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार

शोभा बाई अपने पीछे पति रमेश नाथ और पुत्र शेखर नाथ को छोड़ गई हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है। रमेश नाथ के पैर में रॉड लगी हुई है, जिसके कारण वे नियमित मजदूरी करने में सक्षम नहीं हैं। वहीं पुत्र शेखर अभी छोटा है।

परिवार कच्चे मकान में रहता है। बारिश के मौसम में भी परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल बना हुआ है।

अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं थी पर्याप्त राशि

शोभा बाई के निधन के बाद परिवार के सामने अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना सबसे बड़ी चिंता बन गई थी। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि परिवार अपने स्तर पर अंतिम संस्कार का पूरा खर्च उठा सके।

परिवार की स्थिति की जानकारी जब आष्टा युवा संगठन के अध्यक्ष आनंद गोस्वामी को मिली तो उन्होंने संगठन के सदस्यों के साथ चर्चा कर तत्काल मदद का निर्णय लिया। संगठन ने आगे बढ़कर शोभा बाई के अंतिम संस्कार का पूरा खर्च उठाया।

इसके साथ ही परिवार को एक माह का आवश्यक राशन भी उपलब्ध कराया गया, ताकि इस कठिन समय में कम से कम भोजन की चिंता कुछ हद तक दूर हो सके।

दुख की घड़ी में मिला सहारा

परिवार पहले ही अपने सदस्य को खोने के गहरे सदमे में था। ऐसे समय में आर्थिक परेशानी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी थीं। आष्टा युवा संगठन की मदद से परिवार को अंतिम संस्कार की चिंता से राहत मिली और आगे के कुछ दिनों के लिए राशन की व्यवस्था भी हो गई।

संगठन की इस पहल ने यह संदेश दिया कि सच्ची सामाजिक सेवा वही है, जिसमें जरूरतमंद व्यक्ति के सबसे कठिन समय में उसके साथ खड़ा हुआ जाए। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की परिस्थिति को समझते हुए संगठन द्वारा तत्काल सहायता उपलब्ध कराना मानवीय संवेदना का उदाहरण है।

सेवा कार्यों की हो रही सराहना

आष्टा युवा संगठन द्वारा जरूरतमंद और असहाय परिवारों की मदद के लिए किए जा रहे प्रयासों की क्षेत्र में सराहना की जा रही है। संगठन की

इस पहल से समाज में सहयोग, सेवा और मानवता की भावना को बढ़ावा मिलने का संदेश गया है।

दुख की घड़ी में किसी जरूरतमंद का हाथ थामना ही मानवता है और आष्टा युवा संगठन ने इस परिवार के लिए यही संवेदना दिखाई।

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