*2 अक्टूबर के चक्का जाम से घबराया प्रशासन:*
*चिखली देशमुख होटल के पास रातों-रात सुधरने लगीं सड़कें और लाइटें*

*2 अक्टूबर के चक्का जाम से घबराया प्रशासन:*
*चिखली देशमुख होटल के पास रातों-रात सुधरने लगीं सड़कें और लाइटें*
*शेखर ठाकुर संपादक छत्तीसगढ़।*
प्रदर्शन की आहट से जगी व्यवस्था— सवाल पूछने से पहले ही लीपापोती की होड़, जनता बोली: “यह विकास नहीं, पर्दाफाश से बचने का डर है”
विशेष संवाददाता
लोकतंत्र में जब जनता सड़क पर उतरने का मन बना लेती है, तो गहरी नींद में सोई व्यवस्था अचानक हरकत में आ जाती है। 2 अक्टूबर को चिखली देशमुख होटल के पास आयोजित होने वाले विशाल चक्का जाम प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के हाथ-पाँव फूल गए हैं। प्रदर्शन के दिन जनता के तीखे सवालों का सामना करने से बचने के लिए अब आनन-फानन में लीपापोती की तैयारियाँ तेज कर दी गई हैं।
2 अक्टूबर का चक्का जाम और प्रशासन की हड़बड़ाहट
चिखली देशमुख होटल का चौराहा लंबे समय से बदहाल सड़कों और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों का गवाह रहा है। क्षेत्रीय नागरिकों द्वारा 2 अक्टूबर को यहाँ चक्का जाम करने का ऐलान किया गया है। जैसे ही इस उग्र प्रदर्शन की जानकारी प्रशासन को लगी, अधिकारी और जनप्रतिनिधि रातों-रात सक्रिय हो गए। सालों से लटके कामों को 24 घंटे के भीतर समेटने की हड़बड़ी साफ नज़र आ रही है।
सड़कों पर मुरूम-बजरी का ‘पैचवर्क’
जिन गड्ढों के कारण रोजाना हादसे हो रहे थे, वहाँ अब रातों-रात बजरी और मुरूम गिराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई डामरीकरण या पक्का निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को हल्का करने और आंदोलनकारियों को चुप कराने का चलाऊ पैचवर्क है। बारिश की पहली बौछार या भारी वाहनों की आवाजाही में यह मुरूम धूल बनकर उड़ जाएगा।
अंधेरे में डूबी लाइटों को अचानक मिला ‘अभयदान’
देशमुख होटल परिसर और आसपास के मार्गों पर महीनों से बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को ठीक करने के लिए बिजली विभाग की टीमें मुस्तैद कर दी गई हैं। जनप्रतिनिधियों को डर सता रहा है कि प्रदर्शन के दिन अगर चौराहे पर अंधेरे और बदहाली को लेकर घेराबंदी हुई, तो जवाब देते नहीं बनेगा।
जनता का तीखा वार: “हिसाब तो पूरा देना पड़ेगा”
प्रदर्शनकारियों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के इस रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया है।
आंदोलनकारियों का स्पष्ट संदेश: “जब महीनों तक पत्राचार किया गया, तब अधिकारी नींद में सोए रहे। आज 2 अक्टूबर के चक्का जाम की आहट से लीपापोती की जा रही है। हम इस अस्थायी मुरूम और झूठे पैचवर्क से बहलने वाले नहीं हैं। प्रदर्शन अपने तय समय पर चिखली देशमुख होटल के पास ही होगा और हम जनप्रतिनिधियों से इतने लंबे समय की अनदेखी का हिसाब मांगेंगे।”
अब देखना यह होगा कि 2 अक्टूबर को चिखली देशमुख होटल के पास होने वाले चक्का जाम में प्रशासन अपनी इस “अस्थायी लीपापोती” के दम पर जनता के गुस्से को शांत कर पाता है या नहीं।
खम्बो के लाइट सुधार का कार्य भी शांति नगर चिखली मे देखा जा रहा हैँ और रात मे और सुबह मटेरियल गिरवाया गया हैँ

