E-Paperhttps://bharatsamvadtv.com/wp-content/uploads/2024/01/jjujuu.gifछत्तीसगढ़टॉप न्यूज़देशधर्मराजनीतिराज्यलोकल न्यूज़

*गणेश विसर्जन में पुलिस व्यवस्था रही नदारद रसूखदारों के आगे बेबस दिखी खाकी,

आम जनता और मीडिया से अभद्रता ने बढ़ाई नाराजगी*!!

*गणेश विसर्जन में पुलिस व्यवस्था रही नदारद रसूखदारों के आगे बेबस दिखी खाकी, आम जनता और मीडिया से अभद्रता ने बढ़ाई नाराजगी*!!

 

 *गिरधारी सावरकर     

(सिटी संवाददाता)….* राजनांदगांव शहर में इस बार गणेश विसर्जन के दौरान पुलिस की लचर कार्यशैली और दोहरी व्यवस्था के चलते आम नागरिकों में भारी नाराजगी देखने को मिली है। विसर्जन पर्व पर पुलिस का इकबाल कमजोर नजर आया, जहाँ एक ओर रसूखदार समितियों ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी झांकियों को घंटों सड़कों पर रोके रखा, वहीं दूसरी ओर पुलिस मूकदर्शक बनी लाचार नजर आई। इस दौरान जाम की स्थिति से जूझते रहे दर्शनार्थियों और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

(*रसूखदारों के सामने नतमस्तक हुई पुलिस*)

सूत्रों के अनुसार, शहर के मुख्य मार्गों पर रसूखदार लोगों और कुछ विशेष समितियों ने अपनी झांकियों को मनमाने तरीके से घंटों रोके रखा, जिससे पीछे चल रही अन्य समितियों की झांकियों के साथ यातायात पूरी तरह ठप हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पीछे चल रही समितियों के लोगों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोक और विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। हैरानी की बात यह रही कि घंटों से बाधित इस व्यवस्था को पटरी पर लाने और रुकी हुई झांकियों को आगे बढ़ाने की हिम्मत कोई भी जिम्मेदार पुलिस अधिकारी नहीं जुटा पाया।

(*महिला ट्रेनी IPS पर पत्रकार से अभद्रता का आरोप*)

विवाद और जाम के इस माहौल के बीच जब शहर के एक फोटो जर्नलिस्ट ने पुलिस की इस लाचारी और मौके पर उपजे तनाव के दृश्यों को अपने कैमरे में कैद करना चाहा, तो वहाँ तैनात प्रशिक्षु IPS वैशाली जैन ने कथित तौर पर पत्रकार के साथ अभद्रता की। सूत्रों का दावा है कि महिला अधिकारी ने पत्रकार पर दबाव बनाते हुए उसके कैमरे से विसर्जन के दौरान खींची गई सभी तस्वीरें और सामग्रियां डिलीट करवा दीं। वहीं घंटों से जाम लगाए बैठी झांकियों को आगे बढ़ाने या यातायात सुचारू कराने की हिम्मत इस महिला अधिकारी ने नहीं दिखाई, जिसकी चर्चा पूरे शहर में दिनभर होती रही।

*डीजे के नियमों की उड़ी धज्जियां, बैरिकेडिंग से बढ़ी मुसीबत*

विसर्जन के दौरान सुप्रीम कोर्ट और प्रशासन के ध्वनि विस्तारक यंत्रों (DJ) के तय मानकों की भी जमकर धज्जियां उड़ीं। रातभर निर्धारित डेसिबल और समयासीमा के नियमों को ताक पर रखकर डीजे बजाए जाते रहे, लेकिन पुलिस यहां भी पूरी तरह बेबस और नतमस्तक नजर आई।

इसके अलावा, पुलिस प्रशासन की ओर से शहर में की गई रूट व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। अधिकांश जगहों पर मुख्य मार्गों को जोड़ने वाली छोटी गलियों और रास्तों को बैरिकेड्स लगाकर पूरी तरह बंद कर दिया गया था। जानकारों का मानना है कि यदि ये रास्ते खुले रहते, तो भीड़ स्वतः डायवर्ट हो जाती और भारी जाम की स्थिति से बचा जा सकता था। रास्तों को बेवजह बंद किए जाने से शहरवासियों और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

लोगों का कहना है त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने और सुगम यातायात की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस का इस तरह रसूखदारों के आगे नतमस्तक होना और अपनी नाकामी छुपाने के लिए मीडिया पर धौंस जमाना शहर में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। आम जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या पुलिस के नियम सिर्फ आम आदमी के लिए हैं और वीआईपी संस्कृति के आगे कानून व्यवस्था पूरी तरह घुटने टेक चुकी है?

शेखर ठाकुर संपादक

शेखर ठाकुर वर्तमान में भारत संवाद न्यूज़ चैनल और दैनिक संवाद अपडेट समाचार पत्र में छत्तीसगढ़ संपादक के रूप कार्यभार संभाल रहे हैं। पत्रकारिता के प्रति अपने समर्पण और स्थानीय मुद्दों पर गहरी पकड़ के लिए पहचाने जाने वाले शेखर, छत्तीसगढ़ की हर छोटी-बड़ी खबर को प्रमाणिकता के साथ जनता और प्रशासन तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!