रांझी के सेंट्रल एकेडमी स्कूल में फटा और गंदगी से सना राष्ट्रीय ध्वज मिलने का दावा, प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
शिक्षा के मंदिर में तिरंगे की दुर्दशा!
रांझी के सेंट्रल एकेडमी स्कूल में फटा और गंदगी से सना राष्ट्रीय ध्वज मिलने का दावा, प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
जबलपुर | न्यूज़ रिपोर्टर मोहित संघी
जिस तिरंगे की आन-बान-शान के लिए देश के वीरों ने अपने प्राण न्योछावर किए, जिस राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान में करोड़ों भारतीय सिर झुकाते हैं, उसकी कथित बदहाल स्थिति ने रांझी के सेंट्रल एकेडमी स्कूल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत के बाद स्कूल परिसर का जायजा लेने पर राष्ट्रीय ध्वज फटा हुआ और गंदगी से सना दिखाई देने का दावा किया गया है। मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और स्कूल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जिस परिसर में बच्चों को संस्कार मिलते हैं, वहीं तिरंगे की ऐसी हालत क्यों?
शिक्षण संस्थान केवल पढ़ाई और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होते। स्कूलों में बच्चों को राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, जिम्मेदारी और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान का संस्कार भी दिया जाता है। ऐसे में यदि स्कूल परिसर में राष्ट्रीय ध्वज की उचित देखरेख नहीं हो रही है, तो यह निश्चित तौर पर गंभीर चिंता का विषय है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज की ऐसी स्थिति देखकर उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। उनका सवाल है कि जब स्कूल परिसर में ही तिरंगे की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो बच्चों को राष्ट्रीय सम्मान और जिम्मेदारी का पाठ किस तरह पढ़ाया जाएगा?
तिरंगा महज कपड़ा नहीं, राष्ट्र के गौरव का प्रतीक
राष्ट्रीय ध्वज देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। इसलिए इसकी गरिमा और निर्धारित नियमों के अनुरूप देखरेख करना प्रत्येक संबंधित संस्था की जिम्मेदारी है।
यदि स्कूल परिसर में तिरंगे की स्थिति वास्तव में नियमों के विपरीत पाई जाती है, तो स्कूल प्रबंधन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राष्ट्रीय ध्वज की देखरेख की जिम्मेदारी किसकी थी और ऐसी स्थिति उत्पन्न होने की वजह क्या रही।
प्रशासन से जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
मामला सामने आने के बाद प्रशासन से पूरे प्रकरण का निष्पक्ष संज्ञान लेने और वास्तविक स्थिति की जांच कराने की मांग उठ रही है। साथ ही जिले के अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी राष्ट्रीय ध्वज की स्थिति और उसके रखरखाव की व्यवस्था की जांच किए जाने की मांग की जा रही है।
नारायण गुप्ता, सरबजीत सिंह नारंग, राहुल डोंगरे, के.के. मिश्रा, राजेश श्रीवास, जग्गू विश्वकर्मा और अनिल शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सवाल तिरंगे की गरिमा के साथ हमारी जिम्मेदारी का भी
यह मामला केवल एक ध्वज की स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि हम बच्चों को राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय सम्मान का पाठ किस तरह सिखा रहे हैं।
अब निगाहें प्रशासन और स्कूल प्रबंधन पर हैं कि मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाती है या नहीं और यदि लापरवाही प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
— न्यूज़ रिपोर्टर मोहित संघी


