आधुनिक तकनीक से बदलेगा पढ़ाई का अंदाज, पीएम श्री अमृतपाली में शिक्षकों को मिला नवाचार का प्रशिक्षण
स्कूल लैब, स्मार्ट क्लास और वैज्ञानिक प्रयोगों के जरिए शिक्षण को प्रभावी बनाने पर दिया गया जोर

संवाददाता-सत्येन्द्र गुप्ता(रानीगंज बाजार)

बलिया। पीएम श्री विद्यालय अमृतपाली में स्टेट टीम की ओर से शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं गणित विषय के शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयों में उपलब्ध आधुनिक तकनीकी एवं वैज्ञानिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, रोचक और प्रयोगात्मक बनाना रहा।
स्टेट टीम के प्रशिक्षक श्री राधेश्याम सिसोदिया ने शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान स्कूल लैब, डिजिटल इंडिया, प्रिज्म, स्मार्ट क्लास, लेंस होल्डर, रेन हार्वेस्टिंग, लाइट एवं साउंड सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रशिक्षक ने बताया कि विज्ञान एवं गणित जैसे विषयों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोग और गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाने से उनकी समझ अधिक विकसित होती है। स्कूल लैब में उपलब्ध उपकरणों के प्रयोग, स्मार्ट क्लास के माध्यम से डिजिटल शिक्षण तथा वैज्ञानिक गतिविधियों के जरिए बच्चों में जिज्ञासा और तार्किक सोच विकसित करने के तरीकों पर विशेष जोर दिया गया।
प्रशिक्षण में रेन हार्वेस्टिंग, प्रकाश एवं ध्वनि जैसे विषयों को प्रयोगात्मक तरीके से समझाने की प्रक्रिया भी साझा की गई। शिक्षकों ने विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता करते हुए आधुनिक संसाधनों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी प्राप्त की और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी पाया।
कार्यक्रम के अंत में पीएम श्री विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रतिमा उपाध्याय ने प्रशिक्षक श्री राधेश्याम सिसोदिया को सम्मानित किया। उन्होंने प्रशिक्षण के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और प्रयोग आधारित प्रशिक्षण से शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ती है तथा विद्यार्थियों के सीखने का अनुभव भी अधिक प्रभावी और आनंददायक बनता है।
कार्यक्रम में शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही। पीएम श्री विद्यालय अमृतपाली में आयोजित यह प्रशिक्षण तकनीक, प्रयोग और नवाचार को शिक्षा से जोड़ने तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
