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जंतर-मंतर पर सियासी घमासान के बीच मोदी सरकार का बड़ा कदम

FCRA 2.0 लागू, धार्मिक ट्रस्टों की फॉरेन फंडिंग का सोर्स बताना अब अनिवार्य

संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव 

जंतर-मंतर पर सियासी घमासान के बीच मोदी सरकार का बड़ा कदम: FCRA 2.0 लागू, धार्मिक ट्रस्टों की फॉरेन फंडिंग का सोर्स बताना अब अनिवार्य

नई दिल्ली:

देश की राजधानी दिल्ली में एक तरफ जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भारी विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी का दौर चल रहा था। वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विदेशी योगदान (नियंत्रण) अधिनियम के तहत सख्त नियम—FCRA 2.0 लागू कर एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार के इस फैसले से विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संस्थानों और ट्रस्टों में हड़कंप मच गया है।

क्या है FCRA 2.0 और क्यों मचा है हड़कंप?

अब तक विदेशों से मिलने वाला दान (फॉरेन फंडिंग) कई धार्मिक और सामाजिक ट्रस्टों के खाते में सीधे आ जाता था, जिसे अक्सर धर्म और समाज सेवा के कार्यों के नाम पर प्राप्त किया जाता था। लेकिन नए नियमों के तहत अब ट्रस्ट या एनजीओ को यह स्पष्ट तौर पर बताना होगा कि पैसा कहां से आ रहा है और उसका मूल स्रोत (Original Source) क्या है।

गृह मंत्रालय का स्पष्ट मानना है कि विदेशी फंडिंग के नाम पर होने वाली वित्तीय अनियमितताओं, संदिग्ध गतिविधियों और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग पर लगाम लगाने के लिए यह पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

चार्टर्ड एकाउंटेंट्स (CA, CS, CMA) के लिए बढ़ी चुनौतियां

FCRA 2.0 के लागू होने के बाद अब वित्तीय एवं कानूनी सलाहकारों—जैसे चार्टर्ड एकाउंटेंट्स (CA), कंपनी सेक्रेटरीज (CS) और कॉस्ट एंड मैनेजमेंट एकाउंटेंट्स (CMA)—की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण हो गई है।

सख्त अनुपालन (Compliance): अब सीए और सीएस को अपने क्लाइंट्स (ट्रस्टों/संस्थाओं) की ऑडिटिंग करते समय फंडिंग के सोर्स की गहन जांच करनी होगी।

बढ़ी जवाबदेही: वित्तीय विवरणियों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अधूरा ब्योरा दिए जाने पर संबंधित प्रोफेशनल्स और संस्थाओं दोनों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

रणनीतिक बदलाव: अब इन पेशेवरों को अपने क्लाइंट्स को नए दिशानिर्देशों के तहत री-स्ट्रक्चरिंग और लीगल फ्रेमवर्क के पालन की सलाह देनी होगी।

राजनीतिक गरमाहट

जंतर-मंतर पर जारी राजनीतिक हंगामे के बीच गृह मंत्रालय के इस कदम को रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। जहां एक ओर विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े इस बड़े कदम को लागू कर साफ संकेत दिया है कि विदेशी धन के इस्तेमाल पर कोई ढील नहीं दी जाएगी।

शेखर ठाकुर संपादक

शेखर ठाकुर वर्तमान में भारत संवाद न्यूज़ चैनल और दैनिक संवाद अपडेट समाचार पत्र में छत्तीसगढ़ संपादक के रूप कार्यभार संभाल रहे हैं। पत्रकारिता के प्रति अपने समर्पण और स्थानीय मुद्दों पर गहरी पकड़ के लिए पहचाने जाने वाले शेखर, छत्तीसगढ़ की हर छोटी-बड़ी खबर को प्रमाणिकता के साथ जनता और प्रशासन तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

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