
बलिया। जिले में पुलिस महकमे की उठापटक और तबादला तो एक साधारण प्रक्रिया है लेकिन कुछ तबादले चर्चा का विषय बन जाते हैं ऐसा ही मामला उभांव थाने के अपराध निरीक्षक नरेश मलिक के अचानक स्थानांतरण का है जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कुछ लोग जहां इसे सोनाडीह मेले की अव्यवस्था से जोड़कर देख रहे हैं तो कोई इसे अन्दरूनी खींचतान का नतीजा बता रहा है।

इसी दौरान शुक्रवार के हिंदुस्तान समाचार पत्र में प्रकाशित एक खबर पर भरोसा करें तो अपराध निरीक्षक नरेश मलिक को कहीं ना कहीं सोनाडीह मेले में फैली अव्यवस्था का जिम्मेदार भी ठहराया गया है, हालांकि इस संदर्भ में जब नरेश मलिक से फोन पर वार्ता की गई तो उनका कहना था
“कि यह सरासर निराधार बात है और मैं सोनाडीह मेले में गया ही नहीं था यह खबर बेबुनियाद है।”
अब इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो देखने वाली बात होगी लेकिन लोगों का कहना है कि इसी घटना के बाद अपराध निरीक्षक का अचानक रातों-रात स्थानांतरण कर दिया गया।
खैर अपराध निरीक्षक के स्थानांतरण का कारण जो भी हो लेकिन उनके जाने से क्षेत्र में चर्चा बनी हुई है और लोगों की मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आ रही है कुछ लोग जहां यह का रहे हैं यह विभागीय व्यवस्था का ही एक हिस्सा है वहीं क्षेत्र के अधिकांश लोगों का कहना है कि अपने कुछ ही दिनों के कार्यकाल में अपराध निरीक्षक ने जगह-जगह वाहन चेकिंग संदिग्धों की छानबीन समेत अपने कड़े रवैये से शहर में बहुत हद तक अपराधियों में डर पैदा कर दिया था खासतौर पर नाबालिग वाहन चालक और बुलेट के साइलेंसर से पटाखे छोड़कर जनता को परेशान करने वाले नए बच्चों सहित नशाखोरों जुआरियों आदि ने चट्टी चौराहों पर जमघट लगाना छोड़ दिया था जबकि लगातार चक्रमण के कारण और भी कई छोटे बड़े अपराधों में बहुत कमी आई थी और शहर में शांति का वातावरण था। ऐसे में आगे देखना होगा कि उनके जाने के बाद इस पद पर किसी अन्य की नियुक्ति विभाग द्वारा कब तक की जाती है? आगे अपराधी घटनाओं में रोक लगी रहती है या अपराधियों के हौसले फिर बढ़ सकते हैं?



