
सेवर।विश्व बौद्धिक संपदा दिवस’ के अवसर पर भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान सेवर में आयोजित एक दिवसीय विशेष कार्यशाला में कृषि नवाचारों, अनुसंधान उपलब्धियों और उनके कानूनी संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. विजय वीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार आधुनिक कृषि अनुसंधान की आधारशिला हैं। उन्होंने बताया कि सरसों की नई एवं उन्नत किस्मों, उन्नत कृषि तकनीकों और शोध निष्कर्षों को पेटेंट सहित अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत सुरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल भारतीय अनुसंधान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है, बल्कि इसका सीधा लाभ किसानों तक भी पहुंचता है।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता, जयपुर स्थित विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय के विपणन अधिकारी डी.आर. डेगडा ने ‘एगमार्क’ मानकों के अंतर्गत सरसों तेल की गुणवत्ता और शुद्धता पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने तेल में नमी, तीखापन, शुद्धता और मिलावट की पहचान के वैज्ञानिक तरीकों को समझाते हुए गुणवत्ता नियंत्रण के महत्व पर जोर दिया।
इसी क्रम में, नई दिल्ली के श्री विवेक श्रीवास्तव ने कृषि अनुसंधान में पेटेंट की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैज्ञानिकों को शोध के प्रारंभिक चरण से ही पेटेंट संबंधी सावधानियां बरतनी चाहिए, ताकि उनके नवाचारों का उचित संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने पेटेंट फाइलिंग की प्रक्रिया और इसके दीर्घकालिक लाभों की भी विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में एक अन्य वक्ता सौरभ जैमन ने कृषि विपणन में बौद्धिक संपदा की भूमिका को स्पष्ट करते हुए बताया कि ट्रेडमार्क और भौगोलिक संकेतक किसी भी उत्पाद की बाजार में पहचान, साख और व्यावसायिक मूल्य को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार शर्मा, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. रामस्वरूप जाट एवं डॉ. भागीरथ राम सहित कुल 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनुभूति शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राज कुमार योगी ने प्रस्तुत किया।


