गटुला में खुलेआम अवैध शराब की बिक्री से आक्रोश
महिलाओं ने अंकिता शर्मा को सौंपा ज्ञापन
क्राइम रिपोर्टर संगीता सिंह राजनांदगांव
गटुला में खुलेआम अवैध शराब की बिक्री से आक्रोश, महिलाओं ने अंकिता शर्मा को सौंपा ज्ञापन
चिखली। चिखली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम गटुला में मुख्य चौक-चौराहों पर धड़ल्ले से बेची जा रही अवैध शराब को लेकर ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। गाँव के माहौल को खराब होने से बचाने और शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए आज बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं ने एकजुट होकर अंकिता शर्मा (अधिकारी/जनप्रतिनिधि) को एक ज्ञापन सौंपा और इस अवैध कारोबार पर तुरंत रोक लगाने की मांग की।
मुख्य चौराहों पर सज रही ‘शराब की मंडियां’
सौंपे गए ज्ञापन में महिलाओं ने दर्द बयां करते हुए कहा कि गाँव के मुख्य चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर नियमित रूप से अवैध शराब बेची जा रही है। इसके कारण दिन-ढलते ही शराबी यहाँ जमा हो जाते हैं, जिससे पूरे गाँव का माहौल दूषित हो रहा है। राह चलती महिलाओं, बच्चियों और कॉलेज जाने वाली छात्राओं को भारी मानसिक प्रताड़ना और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
“अवैध शराब की वजह से हमारे घरों के चिराग बुझ रहे हैं और गाँव में कदम-कदम पर विवाद की स्थिति बनी रहती है। अगर पुलिस और प्रशासन ने इस पर तुरंत कड़ा एक्शन नहीं लिया, तो हमें उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”
— ज्ञापन सौंपने पहुँची ग्रामीण महिलाएँ
ज्ञापन में की गई प्रमुख माँगें:
नियमित गश्त: गटुला गाँव के मुख्य चौराहों पर चिखली थाना पुलिस द्वारा नियमित रूप से गश्त (पेट्रोलिंग) की जाए।
अवैध ठिकानों पर छापेमारी: शराब बेचने वाले मुख्य सरगनाओं और अवैध ठिकानों को चिह्नित कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
कड़ी चौकसी: सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर हुड़दंग करने वालों की तत्काल गिरफ्तारी हो।
कार्रवाई का मिला आश्वासन
ज्ञापन स्वीकार करते हुए अंकिता शर्मा ने महिलाओं की इस गंभीर समस्या को बेहद संवेदनशीलता से लिया। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि गाँव में किसी भी कीमत पर अवैध गतिविधियों को पनपने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने इस मामले में चिखली थाना पुलिस को तत्काल सख्त कार्रवाई करने और गटुला में अवैध शराब की बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने के निर्देश देने की बात कही है।
अब देखना यह होगा कि इस ज्ञापन के बाद चिखली पुलिस कितनी मुस्तैदी से एक्शन लेती है और गटुला की महिलाओं को इस आतंक से कब तक मुक्ति मिलती है

