_पेंड्री जमीन अधिग्रहण घोटाला:
दस्तावेजों में हेरफेर पर बड़ी कार्रवाई, तत्कालीन पटवारी निलंबित*_
*संवाददाता संगीता सिंह*
*_पेंड्री जमीन अधिग्रहण घोटाला: दस्तावेजों में हेरफेर पर बड़ी कार्रवाई, तत्कालीन पटवारी निलंबित*_
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पेंड्री में भू-अधिग्रहित जमीन के सरकारी दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेरफेर और गड़बड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए और प्राथमिक जांच में दोषी पाए जाने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। कलेक्टर के निर्देश पर तत्कालीन हल्का पटवारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। इस कार्रवाई से राजस्व विभाग समेत भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पेंड्री क्षेत्र में किसी विकास परियोजना (या सरकारी काम) के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा था। इस दौरान जमीन के खसरे, नक्शे और मालिकाना हक के दस्तावेजों में भारी गड़बड़ी की शिकायतें प्रशासन को मिल रही थीं। आरोप है कि तत्कालीन पटवारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रसूखदारों और भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में अवैध रूप से बदलाव किए।
मुआवजा राशि को हड़पने और अपात्र लोगों को लाभ देने के लिए असली जमीन मालिकों के हक पर डाका डाला जा रहा था। जब प्रभावित किसानों और ग्रामीणों ने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की, तो प्रशासन ने गुप्त रूप से जांच टीम गठित की।
जांच में खुली पोल, गाज गिरना तय था
राजस्व विभाग की उच्च स्तरीय जांच टीम ने जब अधिग्रहित जमीन के मूल रिकॉर्ड (मिसल बंदोबस्त) और वर्तमान डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान किया, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर ओवरराइटिंग, फर्जी नाम दर्ज करने और रकबा (जमीन का आकार) बदलने के पुख्ता सबूत मिले।
जांच रिपोर्ट में तत्कालीन पटवारी की भूमिका को पूरी तरह संदिग्ध और नियमों के विपरीत पाया गया। कर्तव्य में घोर लापरवाही, भ्रष्टाचार और जालसाजी को बढ़ावा देने के आरोप में अनुविभागीय अधिकारी (SDM) ने कलेक्टर के अनुमोदन के बाद निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
ग्रामीणों में आक्रोश, निष्पक्ष मुआवजे की मांग
इस कार्रवाई के बाद पेंड्री के पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक पटवारी का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा गठजोड़ (सिंडिकेट) काम कर रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि:
पूरे अधिग्रहण प्रक्रिया की नए सिरे से स्क्रूटनी (बारीक जांच) की जाए।
असली भू-स्वामियों को उनका वाजिब मुआवजा दिलाया जाए।
पटवारी के खिलाफ निलंबन के साथ-साथ विभागीय जांच और एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जाए।
प्रशासनिक रुख: “राजस्व रिकॉर्ड में किसी भी तरह की हेरफेर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तत्कालीन पटवारी को निलंबित कर विभागीय जांच सौंप दी गई है। पेंड्री अधिग्रहण मामले के हर एक दस्तावेज की री-वेरिफिकेशन कराई जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और असली हकदारों को न्याय मिलेगा।”
आगे क्या?
पटवारी के निलंबन के बाद अब जांच का दायरा बढ़ गया है। माना जा रहा है कि इस घोटाले में राजस्व विभाग के कुछ अन्य बड़े अधिकारी और बिचौलिए भी बेनकाब हो सकते हैं। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि आगामी मुआवजा वितरण में कोई गड़बड़ी न हो।


