*GDP की रफ्तार 7.8% बताकर वाहवाही, लेकिन महंगाई से जनता बेहाल — मोक्ष कुमार प्रधान**
*GDP की रफ्तार 7.8% बताकर वाहवाही, लेकिन महंगाई से जनता बेहाल — मोक्ष कुमार प्रधान**

**GDP की रफ्तार 7.8% बताकर वाहवाही, लेकिन महंगाई से जनता बेहाल — मोक्ष कुमार प्रधान**

तिलक राम पटेल ब्यूरोचिफ महासमुंद जिला प्रमुख भारत संवाद टीवी न्यूज चैनल दैनिक अपडेट अखबार
“बड़े होर्डिंग्स में विकास के आंकड़े दिखाने के बजाय सरकार बताए कि आम आदमी की रसोई और जेब पर कितना बढ़ा बोझ”
महासमुंद/बसना। देश की अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर सरकार और उसके समर्थकों द्वारा बड़े-बड़े होर्डिंग्स और विज्ञापनों के माध्यम से भारत की GDP ग्रोथ रेट 7.8 प्रतिशत बताकर विकास का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। लेकिन दूसरी ओर गांव, गरीब, किसान, मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवार रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। GDP के आंकड़े भले ही बढ़ रहे हों, लेकिन आम आदमी की थाली और जेब पर पड़ने वाला बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर बसना विधानसभा के सक्रिय कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार को केवल GDP ग्रोथ के आंकड़े दिखाकर वाहवाही लूटने के बजाय महंगाई के वास्तविक आंकड़े भी जनता के सामने रखने चाहिए।
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि आज गांव का आम आदमी यह समझना चाहता है कि यदि देश इतनी तेज गति से आगे बढ़ रहा है तो फिर रसोई का बजट क्यों बिगड़ रहा है? गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की आमदनी के मुकाबले रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? पेट्रोल-डीजल, खाद्य सामग्री, सब्जियां, दाल, तेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों से जुड़े खर्चों ने आम परिवारों के मासिक बजट को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।
उन्होंने कहा कि “सरकार बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर GDP ग्रोथ का प्रतिशत बता रही है, तो उसी होर्डिंग्स में यह भी बताना चाहिए कि पिछले कुछ वर्षों में आम आदमी की रसोई का खर्च कितना बढ़ा है। किसान की लागत कितनी बढ़ी, मजदूर की वास्तविक क्रय शक्ति कितनी बढ़ी और मध्यमवर्गीय परिवार के घरेलू बजट पर कितना अतिरिक्त बोझ पड़ा।”
GDP बढ़ने का लाभ गांव के गरीब तक क्यों नहीं पहुंच रहा?
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि आर्थिक विकास का वास्तविक अर्थ तभी है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। केवल आंकड़ों में विकास दर बढ़ने से गांव की तस्वीर नहीं बदलती। गांव का किसान, खेतिहर मजदूर, छोटे दुकानदार और नौकरीपेशा मध्यमवर्गीय परिवार जब महंगाई से जूझ रहा हो, तब सरकार को केवल GDP के आंकड़ों पर अपनी पीठ थपथपाने के बजाय जनता की समस्याओं का जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल “कमाई और खर्च के बीच बढ़ता अंतर” है। आमदनी सीमित है, लेकिन खर्च लगातार बढ़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई, इलाज, बिजली, खेती की लागत, खाद-बीज, डीजल, घरेलू सामान और दैनिक जरूरतों की कीमतों ने परिवारों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ाया है।
“GDP के साथ महंगाई का रिपोर्ट कार्ड भी जारी करे सरकार”
जिला पंचायत सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने शासन से मांग करते हुए कहा कि जिस तरह सरकार GDP ग्रोथ रेट के आंकड़े जनता के सामने रखकर अपनी उपलब्धियां गिना रही है, उसी तरह महंगाई का भी पारदर्शी रिपोर्ट कार्ड गांव-गांव तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार को सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहिए कि—
आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में कितना बदलाव आया?
खाद्य पदार्थों की कीमतों का असर परिवारों के बजट पर कितना पड़ा?
किसानों की खेती की लागत कितनी बढ़ी?
ग्रामीण मजदूरों की वास्तविक क्रय शक्ति कितनी बढ़ी?
पेट्रोल-डीजल और बिजली जैसे खर्चों का आम परिवार पर कितना प्रभाव पड़ा?
महंगाई पर नियंत्रण के लिए सरकार ने जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाए?
उन्होंने कहा कि “जनता केवल GDP का प्रतिशत नहीं खाती, जनता को अपने घर की रसोई चलानी है। विकास का पैमाना केवल कागज और होर्डिंग्स नहीं, बल्कि आम आदमी के घर की खुशहाली और उसकी क्रय शक्ति भी होनी चाहिए।”
“हकीकत होर्डिंग्स से नहीं, जनता की जेब से पता चलती है”
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि सरकार चाहे जितने बड़े होर्डिंग्स लगा दे, लेकिन जनता को बाजार में जाकर ही वास्तविक स्थिति का सामना करना पड़ता है। हकीकत विज्ञापनों में नहीं, बल्कि बाजार की कीमतों और आम आदमी की जेब में दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि यदि GDP की ग्रोथ इतनी मजबूत है तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसका लाभ किसान, मजदूर, महिला, युवा, छोटे व्यापारी और मध्यमवर्गीय परिवार तक पहुंचे। आर्थिक विकास का फायदा कुछ वर्गों तक सीमित रहने के बजाय समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए।
जनता के सवालों का जवाब दे सरकार
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को जनता की आवाज को गंभीरता से लेना होगा। महंगाई कोई कागजी आंकड़ा नहीं है, बल्कि हर परिवार की रोज की परेशानी है। सुबह की चाय से लेकर बच्चों की पढ़ाई और इलाज तक हर क्षेत्र में बढ़ता खर्च आम आदमी को प्रभावित करता है।
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि “सरकार विकास के आंकड़ों पर जश्न मनाए, हमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन उसी ईमानदारी से महंगाई का सच भी जनता को बताना होगा। अगर GDP देश की तरक्की का पैमाना है, तो आम आदमी की जेब और रसोई उसकी खुशहाली का पैमाना है।”
उन्होंने शासन से मांग की कि महंगाई पर तत्काल प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और ग्रामीण जनता को राहत देने वाली नीतियों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि जनता को केवल आंकड़ों की चमक नहीं, बल्कि रसोई में राहत, जेब में बचत और जीवन में वास्तविक खुशहाली चाहिए।
अंत में मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि “सरकार को GDP की ग्रोथ का जश्न मनाने के साथ-साथ महंगाई की मार झेल रही जनता की आवाज भी सुननी चाहिए। देश तभी मजबूत होगा, जब विकास का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और आम आदमी सम्मान के साथ अपना घर चला सके।”


