भीषण गर्मी में बार-बार गुल हो रही बिजली, कांटाफोड़ की जनता बेहाल कटौती अलग, “स्मार्ट” मीटर के बढ़े बिल अलग… हर 5-7 दिन में मेंटनेंस के नाम पर घंटों ब्लैकआउट जेई बोले — “ऑफिस आकर मिल लो
कांटाफोड़-भीषण गर्मी के बीच कांटाफोड़ नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि हर थोड़ी-थोड़ी देर में बिजली गुल हो रही है। दिन हो या रात, उपभोक्ताओं को यह भरोसा नहीं रहता कि बिजली कब चली जाए। लगातार हो रही अघोषित कटौती ने लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।
एक ओर लोग गर्मी से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर “स्मार्ट” मीटरों के नाम पर बढ़े हुए बिजली बिलों ने आम उपभोक्ताओं की कमर तोड़ दी है। लोगों का कहना है कि पहले जहां घरों में 500 से 700 रुपए तक बिजली बिल आता था, वहीं अब वही बिल बढ़कर सीधे 5 से 7 हजार रुपए तक पहुंचने लगा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली सप्लाई भले ही पूरी नहीं मिल रही, लेकिन बिल “स्मार्ट” तरीके से लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
नगर में हर 5 से 7 दिन के भीतर मेंटनेंस के नाम पर 4 से 6 घंटे तक बिजली सप्लाई बंद कर दी जाती है। विभाग दावा करता है कि व्यवस्था सुधारने के लिए मेंटनेंस किया जा रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब बार-बार घंटों कटौती कर मेंटनेंस किया जा रहा है, तो फिर हर दिन और पूरी रात बिजली आखिर क्यों गुल रहती है?
लोगों का कहना है कि मेंटनेंस के दावे केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। कई इलाकों में लो-वोल्टेज, ट्रिपिंग और बार-बार फाल्ट की समस्या लगातार बनी हुई है। देर रात बिजली बंद होते ही कूलर-पंखे ठप पड़ जाते हैं और घर भट्टी जैसे महसूस होने लगते हैं। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं।
बिजली कटौती का असर अब पेयजल व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। मोटर-पंप बंद होने से कई क्षेत्रों में पानी की समस्या खड़ी हो रही है। नगरवासियों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी एसी कमरों में बैठकर केवल कागजी मेंटनेंस कर रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग है।
जब इस संबंध में बिजली विभाग के जेई आशीष पटेल से चर्चा की गई तो उन्होंने समस्या का समाधान बताने के बजाय केवल इतना कहा — “ऑफिस आकर मिल लो।” जिम्मेदार अधिकारी का यह जवाब लोगों के आक्रोश को और बढ़ाने वाला साबित हुआ है।
नगरवासियों का कहना है कि हर साल गर्मी आते ही बिजली व्यवस्था दम तोड़ देती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कोई स्थायी समाधान निकालने के बजाय केवल अस्थायी बहाने बनाकर काम चला रहा है। यदि जल्द हालात नहीं सुधरे तो जनता आंदोलन की राह पकड़ सकती है। फिलहाल कांटाफोड़ की जनता बिजली कटौती, बढ़े हुए स्मार्ट बिल और विभागीय बेरुखी के बीच पिसती नजर आ रही है।

