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नर्सें मरीज के जीवनमें आशा और विश्वास का दीप प्रज्वलित करती हैं – स्वामी मुक्तिनाथानन्द

अमित चावला /लखनऊ.

नर्सिंग केवल एक पेशा नहीं सेवा, त्याग, संवेदना एवं मानवता का जीवंत उदाहरण:डॉ. एन. वेंकट लक्ष्मी

12 मई को सम्पूर्ण विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय उपचारिका (नर्सेस) दिवस मनाया जाता है।  इसी के उपलक्ष्य में विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ एवं विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक स्कूल एण्ड कॉलेज ऑफ नर्सिंग, लखनऊ में  अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस हर्षाेल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर दो विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रथम कार्यक्रम  संस्थान के केंद्रीय सभागार (सेंट्रल हॉल), भूतल में तथा द्वितीय कार्यक्रम माँ सारदा हॉस्टल स्थित श्राइन हॉल में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरूआत संस्थान के सचिव  स्वामी मुक्तिनाथानन्द , संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डा0 बी0के0 सिंह, नर्सिग एडमिनिसट्रेटर शान्तीमई , नर्सिग कॉलेज के उप प्रधानाचार्य डा0 मेरिडिथ, ओ0टी0मैट्रन  कल्याणी मुखर्जी, डा0 विशाल कुमार सिंह द्वारा द्वीप प्रज्जवलन व उपचारिकाओं के वैदिक मंगलाचरण के साथ हुआ। उस दौरान गणमान्य अतिथियों समेंत संस्थान की शिक्षिकायें, उपचारिकायें एवं प्रशिक्षु उचारिकायें मौजूद थी।

कार्यक्रम में पधारें गणमान्य अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन  सुजीत माथुर एवंकरूनेश पाठक ने कियां तथा वरिष्ठ वार्ड प्रभारी  कुमुद बेन व अर्चना मिश्रा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए पधारे गणमान्य अतिथियों एवं नर्सिग स्टाफ का स्वागत किया।

सर्वप्रथम संस्थान की सबसे वरिष्ठ उपचारिका व ओटी मैट्रन  कल्याणी मुखर्जी ने नर्सेस के उद्भव से लेकर आज तक के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1854 के युद्व से नर्सिग का उद्भव हुआ जिसमें फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने कम संसाधानों मे युद्व में  घायल सैनिको को उपचार दिया। तत्पश्चात इस व्यवसाय को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया।

नर्सेस दिवस के महत्व विषय पर विवेकानन्द कॉलेज ऑफ नर्सिग के उप-प्रधानार्च  मेरिडिथ ने नर्सेस डे की थीम ‘‘हमारी नर्से। हमारा भविष्य। देखभाल की आर्थिक शक्ति।’’ विषय पर उपचारिकाओं को संबोधित किया.नर्स दिवस के महत्व पर एक व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस आधुनिक नर्सिंग की प्रणेता फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन पर मनाया जाता है जिन्हें लोग “लेडी विद दे लैंप” के नाम से भी जानते हैं।

विवेकानन्द कॉलेज ऑफ नर्सिग की प्रोफेसर, गंगा पोटाई ने कहा कि नर्सिंग पेशा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वाेत्तम माध्यम है। नर्सें अपने समर्पण, करुणा एवं सेवा भावना से मरीजों के जीवन में आशा का संचार करती हैं उनकी निस्वार्थ सेवा समाज के लिए एक प्रेरणा एवं आशीर्वाद है।

इस अवसर पर संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बी. के. सिंह ने कहा कि नर्सें स्वास्थ्य सेवा संस्थान की मुख्य सैनिक होती हैं, जो हर परिस्थिति में मरीजों की सेवा में तत्पर रहती हैं। उनकी मेहनत, समर्पण और संवेदनशीलता अस्पताल की व्यवस्था को सशक्त बनाती है। रोगियों की देखभाल एवं उपचार प्रक्रिया में नर्सों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है तथा स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता में नर्सों का योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

संस्थान के कार्मिक अधिकारी  विशाल कुमार सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि नर्सें केवल स्वास्थ्य सेवाओं का अभिन्न अंग ही नहीं, बल्कि एक सक्षम टीम लीडर की भूमिका भी निभाती हैं।
संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द  महाराज  ने किया अपने अध्यक्षीय भाषण में  गणमान्य अतिथियों समेंत संस्थान की शिक्षिकायें, उपचारिकाओं एवं प्रशिक्षु उचारिकाओं को नर्सेस दिवस की हार्दिक बधाईयाँ दी तथा नर्सिग दिवस पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उपस्थित नर्सो को प्रेरक भाषण देते हुये कहा कि नर्सिंग सेवा मानवता की सबसे महान एवं संवेदनशील सेवाओं में से एक है। एक नर्स केवल अस्पताल की कर्मचारी नहीं होती, बल्कि वह रोगियों के लिए आशा, विश्वास और करुणा का जीवंत स्वरूप होती है।

इस अवसर पर डॉ. एन. वेंकट लक्ष्मी,प्राचार्या, विवेकानन्द कॉलेज ऑफ नर्सिंग ने ‘‘हमारी नर्से। हमारा भविष्य। नर्सों की देखभाल अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती है’’ विषय पर अपना प्रेरणादायी उद्बोधन देते हुए कहा कि नर्सिंग केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा, त्याग, संवेदना एवं मानवता का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि एक सशक्त एवं प्रशिक्षित नर्स किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति होती है।

. डॉ एन. वेंकट लक्ष्मी, प्राचार्या, विवेकानन्द कॉलेज ऑफ नर्सिंग द्वारा स्वामी मुक्तिनाथानन्द  महाराज को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

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