
राजनांदगांव: अघोषित बिजली कटौती से जनता बेहाल, व्यापार ठप; सरकार की चुप्पी से बढ़ रहा आक्रोश
राजनांदगांव | [आज की तिथि] संस्कारधानी राजनांदगांव में इन दिनों भीषण गर्मी के बीच बिजली की आंख-मिचौली ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बार-बार हो रही अघोषित बिजली कटौती से न केवल आम नागरिक परेशान हैं, बल्कि छोटे-बड़े उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या पर शासन और प्रशासन की चुप्पी ने अब जनता के सब्र का बांध तोड़ना शुरू कर दिया है।
कामकाज पर पड़ा बुरा असर
बिजली की अनियमितता के कारण शहर के कामकाज पर सीधा प्रहार हुआ है। स्थिति यह है कि:
लघु उद्योग: वेल्डिंग वर्कशॉप, आटा चक्की और फोटोकॉपी जैसी दुकानें घंटों बंद रह रही हैं।
व्यापारिक नुकसान: बार-बार ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज के कारण कई व्यापारियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कीमती मशीनें खराब हो रही हैं।
वर्क फ्रॉम होम: इंटरनेट और बिजली न होने से आईटी सेक्टर और ऑनलाइन काम करने वाले युवाओं का करियर प्रभावित हो रहा है।
आम नागरिक और विद्यार्थी परेशान
तपती धूप और उमस के बीच घंटों बिजली गुल रहने से बुजुर्गों और मरीजों की हालत बिगड़ रही है। वहीं, परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह समय काल बनकर आया है। रात के समय होने वाली कटौती से लोगों की नींद हराम हो गई है, जिससे अगले दिन के कामकाज पर भी मानसिक थकान का असर दिख रहा है।
“हम बिजली बिल तो समय पर भरते हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर हमें सिर्फ कटौती मिलती है। बार-बार शिकायत के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकलता।” > — एक स्थानीय निवासी, राजनांदगांव
सरकार और विभाग की रहस्यमयी चुप्पी
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर विद्युत विभाग के अधिकारी ‘मेंटेनेंस’ का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं, जबकि सरकार की ओर से इस संकट को दूर करने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नजर नहीं आ रहा है। विपक्षी दलों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने सरकार पर “जनविरोधी मौन” साधने का आरोप लगाया है।
बढ़ता जन-आक्रोश
राजनांदगांव की जनता का कहना है कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरकर चक्काजाम और बिजली ऑफिस का घेराव करने को मजबूर होंगे। व्यापारियों ने भी चेतावनी दी है कि कामकाज प्रभावित होने से होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
निष्कर्ष: बिजली किसी भी शहर की जीवनरेखा होती है। राजनांदगांव जैसे बढ़ते शहर में बिजली की यह बदहाली न केवल विकास की गति को रोक रही है, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर रही है। अब देखना यह होगा कि सरकार अपनी ‘नींद’ तोड़कर जनता को राहत देती है या नहीं।
