कोजरा का परशुराम मंदिर: आस्था, इतिहास और चमत्कार का संगम
800 वर्ष पुराना मंदिर, जहां आज भी जीवित हैं परंपराएं और चमत्कार की कथाएं
रिपोर्ट:-सुरेश चौहान (9571081159)
राजस्थान के सिरोही जिले की पिंडवाड़ा तहसील के छोटे से गांव कोजरा में स्थित भगवान परशुराम मंदिर आज श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। लगभग 800 वर्ष प्राचीन माने जाने वाले इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व लगातार बढ़ रहा है।

भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम को समर्पित यह मंदिर पिंडवाड़ा से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मंदिर का संचालन श्री परशुराम सेवा मंडल ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, जबकि यहां नियमित पूजा-अर्चना त्रिवेदी गोरवाल ब्राह्मण परिवार द्वारा विधि-विधान से संपन्न होती है, जिससे परंपराएं आज भी जीवंत बनी हुई हैं।

मंदिर परिसर में भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ की प्राचीन प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। साथ ही भगवान परशुराम के शस्त्र ‘फरसा’ का प्रतीक भी यहां स्थापित है। परिसर में गणपति, शीतला माता, कोटेश्वर महादेव और नीलकंठ महादेव सहित कई अन्य देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद हैं, जो इसे एक समृद्ध धार्मिक स्थल बनाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम ने अपने तप, ब्रह्मचर्य और पराक्रम के बल पर पृथ्वी को 21 बार क्षत्रियों से विहीन किया था। उनका उल्लेख रामचरितमानस में भी मिलता है, खासकर लक्ष्मण और परशुराम संवाद के प्रसंग में।
मंदिर से जुड़ी एक चमत्कारी कथा भी स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित है। कहा जाता है कि लगभग 250 वर्ष पूर्व चोरी के इरादे से आए डाकुओं को यहां दिव्य शक्ति का सामना करना पड़ा, जिससे वे या तो दृष्टिहीन हो गए या भयभीत होकर भाग निकले। बाद में उन्होंने पश्चाताप करते हुए इस क्षेत्र में दोबारा न आने की कसम खाई।
मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन बावड़ी और विशाल तालाब जल संरक्षण की उत्कृष्ट मिसाल पेश करते हैं, जो आज भी अच्छी स्थिति में हैं। वहीं ‘परशुराम वाटिका’ की हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करता है।

स्थानीय पुजारी नीलेश त्रिवेदी के अनुसार, यह मंदिर केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आसपास स्थित जबलक ऋषि का मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
समय के साथ यह मंदिर राजस्थान की धार्मिक विरासत का एक अनमोल धरोहर बनकर उभर रहा है, जहां हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।


