प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनें, पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं : शिवलाल लकड़ा*
प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनें, पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं : शिवलाल लकड़ा*

*प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनें, पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं : शिवलाल लकड़ा*

तिलक राम पटेल महासमुंद ब्यूरोचिफ भारत संवाद टीवी न्यूज चैनल दैनिक अपडेट पेपर
“विश्व पर्यावरण दिवस पर शिवलाल लकड़ा का संदेश : प्रकृतिश संरक्षण को जन-जन का संकल्प बनाने का आह्वान”
सरायपाली/महासमुंद। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा जिला उपाध्यक्ष शिवलाल लकड़ा ने समस्त नागरिकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया है। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सभ्यता और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की अमूल्य धरोहर है। पृथ्वी, जल, वायु, वन एवं जैव विविधता का संरक्षण मानव जीवन के अस्तित्व और समग्र विकास के लिए अनिवार्य है।
लकड़ा ने कहा कि आज विश्व बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, जल संकट, वनों के क्षरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के अविवेकपूर्ण एवं असंतुलित उपयोग जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विषय नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य को सुरक्षित रखने का संकल्प है। यदि हम आज प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं समझेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने सदैव प्रकृति को पूजनीय माना है। हमारे ऋषि-मुनियों ने वृक्षों, नदियों, पर्वतों और समस्त प्राकृतिक तत्वों को जीवन का अभिन्न अंग मानकर उनके संरक्षण का संदेश दिया है। प्रकृति और मानव के बीच यही आत्मीय संबंध हमारी सांस्कृतिक पहचान की सबसे बड़ी विशेषता है। आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी इस गौरवशाली परंपरा को व्यवहार में उतारते हुए पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाएं।
लकड़ा ने नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, जल संरक्षण को अपनाने, स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक वृक्ष केवल पौधा नहीं, बल्कि जीवन, आशा, हरियाली और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक है। आज लगाया गया एक पौधा आने वाले वर्षों में अनेक लोगों को शुद्ध वायु, छाया और स्वस्थ वातावरण प्रदान कर सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक अर्थ केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी निभाना भी है। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को समझते हुए सकारात्मक पहल करेगा, तभी एक स्वच्छ, हरित, समृद्ध और पर्यावरण-संतुलित भारत का निर्माण संभव होगा।
लकड़ा ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि प्रकृति का संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। आज प्रकृति के लिए उठाया गया प्रत्येक छोटा कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य उपहार सिद्ध होगा।
अंत में उन्होंने सभी नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान करते हुए कहा—
“पेड़ लगाएं, पर्यावरण बचाएं;
हरियाली बढ़ाएं, जीवन मुस्कुराएं।”
उन्होंने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने तथा धरती को हरा-भरा और प्रदूषणमुक्त बनाने में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की।
विश्व पर्यावरण दिवस की समस्त नागरिकों को हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं।

