जहां कभी नक्सलवाद ने भविष्य पर पहरा लगाया,
वहीं अब वर्दी के लिए पसीना बहा रहे युवा!!

जहां कभी नक्सलवाद ने भविष्य पर पहरा लगाया, वहीं अब वर्दी के लिए पसीना बहा रहे युवा!!
सुमित (जिला संवाददाता, कांकेर)
कांकेर पुलिस का ‘मिशन रक्षक’ बना बदलाव की नई तस्वीर, पांच प्रशिक्षण केंद्रों में 1400 से अधिक युवक-युवतियां कर रहे सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी
कांकेर। करीब पांच दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती झेल चुके कांकेर जिले के अंदरूनी इलाकों में अब बदलाव की एक नई तस्वीर दिखाई दे रही है। जिन क्षेत्रों में कभी बंदूक और भय युवाओं के भविष्य को प्रभावित करते थे, उन्हीं इलाकों के युवा आज अपने हाथों में किताबें और पैरों में दौड़ के जूते लेकर सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। कांकेर पुलिस का ‘मिशन रक्षक’ इन युवाओं के सपनों को नई दिशा देने का माध्यम बन रहा है।
नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों को अब मुख्यधारा से जोड़ने और वहां के युवाओं को रोजगार एवं बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कांकेर पुलिस द्वारा भानुप्रतापपुर, अंतागढ़, कोयलीबेड़ा, आमाबेड़ा और पखांजूर में पांच प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में 1400 से अधिक युवक-युवतियां सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए शारीरिक एवं लिखित परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
बदलते कांकेर की नई तस्वीर
मिशन रक्षक की सबसे खास बात यह है कि इसमें युवतियों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। अंदरूनी इलाकों की बेटियां भी अब पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दौड़ लगा रही हैं और वर्दी पहनने का सपना देख रही हैं। यह केवल सरकारी नौकरी की तैयारी नहीं, बल्कि उन इलाकों में बदलती सोच और बढ़ते आत्मविश्वास की कहानी भी है।
कभी जिन जंगलों में नक्सल गतिविधियों के कारण युवाओं के सामने शिक्षा, रोजगार और सुरक्षित भविष्य की राह मुश्किल नजर आती थी, आज वहीं युवा अनुशासन और मेहनत के साथ अपने भविष्य की नींव तैयार कर रहे हैं। सुबह की दौड़, शारीरिक अभ्यास और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते इन युवाओं में अपने दम पर आगे बढ़ने का जज्बा साफ दिखाई देता है।
बंदूक के साये से वर्दी के सपने तक
कांकेर के अंदरूनी इलाकों में हो रहा यह बदलाव अपने आप में महत्वपूर्ण है। एक समय था जब नक्सलवाद युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा था। लेकिन अब वही युवा सुरक्षा बलों में भर्ती होकर देश और समाज की सेवा करने का सपना देख रहे हैं।
जिस जंगल में कभी बंदूक युवाओं का भविष्य तय करती थी, आज उसी जंगल का युवा अपनी मेहनत से अपना भविष्य तय कर रहा है।
मिशन रक्षक इसी बदलाव को गति देने की कोशिश है। पुलिस का उद्देश्य केवल युवाओं को भर्ती परीक्षा के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना, उनके भीतर आत्मविश्वास पैदा करना और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसरों तक पहुंचने के लिए सक्षम बनाना भी है।
युवा शक्ति से बदल रही तस्वीर
पांच प्रशिक्षण केंद्रों में बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि अंदरूनी क्षेत्रों में अब युवा अपने भविष्य को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं। खासकर युवतियों की बढ़ती भागीदारी इस बदलाव को और मजबूत करती है।
कांकेर के नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में मिशन रक्षक के माध्यम से तैयार हो रही यह नई पीढ़ी केवल वर्दी हासिल करने के लिए मेहनत नहीं कर रही, बल्कि यह उन इलाकों की बदलती तस्वीर का प्रतीक बन रही है।
कभी संघर्ष के लिए पहचाने जाने वाले इन जंगलों में अब सपनों के लिए दौड़ लग रही है। यही बदलते कांकेर और बदलते बस्तर की नई कहानी है।


