प्रशासनिक खींचतान: भिलाई-चरौदा के पूर्व आयुक्त दशरथ सिंह राजपूत अधर में लटके,
*नए पद पर नहीं किया ज्वाइन* *जानें अब क्या हो सकती है कार्रवाई*

प्रशासनिक खींचतान: भिलाई-चरौदा के पूर्व आयुक्त दशरथ सिंह राजपूत अधर में लटके,
*नए पद पर नहीं किया ज्वाइन*
*जानें अब क्या हो सकती है कार्रवाई*
संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव।
दुर्ग/सारंगढ़-बिलाईगढ़:
भिलाई-चरौदा नगर निगम के पूर्व आयुक्त दशरथ सिंह राजपूत के स्थानांतरण को लेकर उत्पन्न हुआ प्रशासनिक गतिरोध अब एक नया मोड़ ले चुका है। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के तहत उन्हें अपर कलेक्टर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ के पद पर पदस्थ किया गया था। हालांकि, निर्धारित समयावधि के भीतर उन्होंने अपने नए पद पर कार्यभार (जॉइनिंग) ग्रहण नहीं किया।
प्रशासनिक कार्यों में सुगमता और व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए श्री चंद्रकांत कौशिक को सारंगढ़-बिलाईगढ़ का नया अपर कलेक्टर नियुक्त कर दिया है, जिन्होंने तत्काल प्रभाव से अपना पदभार भी ग्रहण कर लिया है। दूसरी ओर, भिलाई-चरौदा नगर निगम में नए आयुक्त के रूप में एस. के. सुंदरानी ने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है।
इस पूरी प्रक्रिया के बाद पूर्व आयुक्त दशरथ सिंह राजपूत एक अजीबोगरीब प्रशासनिक संकट में फंस गए हैं। वर्तमान स्थिति में वे अपने नए पद पर पदभार ग्रहण करने से चूक गए हैं, जबकि भिलाई-चरौदा निगम से भी उन्हें मुक्त (रिलीव) कर दिया गया है। ऐसे में वे फिलहाल ‘वेटिंग फॉर पोस्टिंग’ या बिन विभाग के अधिकारी बनकर रह गए हैं।
आदेश की अवहेलना पर प्रशासन कर सकता है कड़ा रुख अख्तियार
सरकारी सेवा नियमों (Civil Services Rules) और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुसार, स्थानांतरण आदेश का समय पर पालन न करना और बिना किसी पूर्व स्वीकृति या वैध कारण के नए पद पर ज्वाइन न करना गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इस स्थिति में राज्य शासन पूर्व आयुक्त के विरुद्ध निम्नलिखित सख्त कदम उठा सकता है:
कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice):
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा उन्हें नोटिस जारी कर यह स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर नए पद पर कार्यभार ग्रहण न करने के पीछे क्या कारण थे।
डाईज-नॉन (Dies-Non) या अवैतनिक अवधि घोषणा:
भिलाई-चरौदा से रिलीव होने की तिथि से लेकर नई पदस्थापना मिलने तक की अवधि को ‘डाईज-नॉन’ (सेवा में व्यवधान) या बिना वेतन का अवकाश घोषित किया जा सकता है, जिससे उनकी सेवा पुस्तिका (Service Book) और पेंशन पर असर पड़ सकता है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Proceedings):
स्थानांतरण आदेश का पालन न करने को ‘शासकीय आदेशों की अवहेलना’ मानते हुए उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के तहत विभागीय जांच (Departmental Enquiry) शुरू की जा सकती है।
कम महत्व वाले पद पर लूप-लाइन पदस्थापना:
शासन द्वारा अनुशासनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें सचिवालय या किसी अन्य विभाग में गैर-महत्वपूर्ण (Loop-line) पद पर भेजा जा सकता है।
वार्षिक वेतनवृद्धि (Increment) रोकना:
यदि शासन उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं होता है, तो उनकी आगामी वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) पर रोक लगाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा गरम:
एक ओर जहां नए अधिकारियों ने अपनी-अपनी कमान संभालकर कामकाज गतिमान कर दिया है, वहीं प्रशासनिक गलियारों में यह सवाल तैर रहा है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पूर्व आयुक्त ने समय पर ज्वाइनिंग क्यों नहीं दी? अब देखना यह होगा कि सामान्य प्रशासन विभाग इस मामले में पूर्व आयुक्त के स्पष्टीकरण का इंतजार करता है या सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई का चाबुक चलाता है।
राज्य शासन द्वारा हाल ही में किए गए प्रशासनिक फेरबदल के बाद एक अहम प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। भिलाई-चरौदा नगर निगम के पूर्व आयुक्त दशरथ सिंह राजपूत द्वारा निर्धारित समय पर नए पद पर उपस्थिति दर्ज न कराने के बाद, राज्य सरकार ने नया आदेश जारी कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आदेश के तहत दशरथ सिंह राजपूत को अपर कलेक्टर, बिलाईगढ़-सारंगढ़ के पद पर स्थानांतरित किया गया था। हालांकि, नियत समयावधि बीत जाने के बाद भी उन्होंने अपने नए पद पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया।
प्रशासनिक व्यवस्था के तहत नई नियुक्ति
शासन ने प्रशासनिक गतिविधियों और व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए त्वरित निर्णय लेते हुए चंद्रकांत कौशिक को बिलाईगढ़-सारंगढ़ का अपर कलेक्टर नियुक्त किया है। आदेश के बाद उन्होंने अपना पदभार भी ग्रहण कर लिया है।
भिलाई-चरौदा निगम में एस. के. सुंदरानी ने संभाली कमान
दूसरी ओर, भिलाई-चरौदा नगर निगम में नव-नियुक्त आयुक्त एस. के. सुंदरानी ने अपने पद का प्रभार संभाल लिया है, और पूर्व आयुक्त दशरथ सिंह राजपूत को भिलाई-चरौदा निगम से पूरी तरह पदमुक्त कर दिया गया है।

