*भिलाई-3 शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और नामांतरण का ‘खेल’?*
*कृष्णा चंद्राकर के बेटे कुणाल के नाम हस्तांतरित हुई जमीन, जांच के नाम पर एसडीएम के गोलमोल जवाब से उठे सवाल*

*भिलाई-3 शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और नामांतरण का ‘खेल’?*
*कृष्णा चंद्राकर के बेटे कुणाल के नाम हस्तांतरित हुई जमीन, जांच के नाम पर एसडीएम के गोलमोल जवाब से उठे सवाल*
*संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव।*
भिलाई – 3 में कीमती शासकीय (सरकारी) भूमि पर अवैध कब्जे, संदिग्ध नीलामी और भू-हस्तांतरण प्रक्रिया को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि इस विवादित सरकारी जमीन को कृष्णा चंद्राकर के बेटे कुणाल चंद्राकर के नाम पर हस्तांतरित कर दिया गया है।
शासकीय संपत्ति को इस तरह व्यक्तिगत नाम पर दर्ज किए जाने के बाद जब मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी हुए, तो ‘स्थानीय मीडिया’ ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी एसडीएम प्रकाश सोनी से मुलाकात कर पूरी वस्तुस्थिति जाननी चाही। लेकिन इस गंभीर मामले पर भी एसडीएम का रवैया और जवाब पूरी तरह असंतोषजनक और टालमटोल भरा रहा।
एसडीएम का केवल यह कहना कि “जांच अभी जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही रिपोर्ट सौंपी जाएगी”, कई नए संशयों और आशंकाओं को जन्म दे रहा है। जब इतने बड़े पैमाने पर शासकीय भूमि के नामांतरण का खेल उजागर हो चुका है, तो प्रशासनिक अमला पारदर्शी जानकारी देने से क्यों कतरा रहा है? क्या इस बहुमूल्य जमीन के पीछे किसी बड़े राजनीतिक-प्रशासनिक सिंडिकेट की मिलीभगत काम कर रही है?
परत दर परत खुल रहे हैं धांधली के पन्ने
महज चार दिन पहले ही इस क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और बहुमंजिला इमारतों के निर्माण को लेकर एक प्रमुख खबर प्रकाशित की गई थी। उस खबर के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप तो मचा, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस और पारदर्शी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
स्थानीय निवासियों और सूत्रों की मानें तो कुणाल चंद्राकर के नाम जमीन हस्तांतरण का यह मामला महज एक बानगी है। भिलाई-3 में ऐसी दर्जनों सरकारी जमीनें हैं जिन पर भू-माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों की ढिलाई या सांठगांठ का फायदा उठाकर कब्जा जमाया है। फर्जी दस्तावेजों और मिलीभगत के सहारे किए जा रहे इस फर्जीवाड़े की यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो ऐसे कई और मामले ‘परत दर परत’ बाहर आएंगे।
उठते तीखे सवाल: जिनका जवाब चाहता है भिलाई
शासकीय भूमि का हस्तांतरण किसके आदेश से?

सरकारी जमीन कृष्णा चंद्राकर के पुत्र कुणाल चंद्राकर के नाम कैसे और किस प्रक्रिया के तहत हस्तांतरित की गई? इस फाइल पर दस्तखत करने वाले अधिकारी कौन हैं?
पारदर्शिता पर पर्दा क्यों?
जांच जारी होना एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन कुणाल चंद्राकर के नाम हुए इस संदिग्ध नामांतरण पर प्राथमिक स्थिति स्पष्ट करने में प्रशासन को क्या हिचकिचाहट है?
निर्माण और कब्जे पर रोक कब?
जब तक जांच चल रही है, तब तक क्या इस हस्तांतरित भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण या व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाई गई है?
अधिकारियों पर कार्रवाई कब?
शासकीय भूमि का व्यक्तिगत नाम पर नामांतरण बिना पटवारी, आरआई और राजस्व अमले की सीधी संलिप्तता के संभव नहीं है। क्या जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज होगा?
जनहित में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की दरकार
करोड़ों रुपये मूल्य की शासकीय भूमि को निजी हाथों में सौंपने और फिर जांच के नाम पर लीपापोती की कोशिश ने सीधे-सीधे प्रशासनिक साख को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अधिकारी भले ही ‘जांच जारी है’ का रटा-रटाया जवाब देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन मीडिया और क्षेत्र की जनता इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है।
अब देखना यह होगा कि एसडीएम प्रकाश सोनी की जांच रिपोर्ट में कुणाल चंद्राकर के नाम जमीन हस्तांतरित करने वाले असली चेहरों का पर्दाफाश होता है या फिर यह मामला भी फाइल में दबा दिया जाता है।

