गुरसरांय सीएचसी बदहाली का शिकार: फार्मासिस्ट की कमी बनी मरीजों के लिए जी का जंजाल, उच्च अधिकारियों से तत्काल नियुक्ति की मांग

ब्यूरो चीफ आयुष त्रिपाठी
गुरसरांय (झांसी)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसरांय इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है। अस्पताल में फार्मासिस्ट की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से इलाज कराने आ रहे मरीजों को डॉक्टर द्वारा लिखी दवाइयां पाने के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है, वहीं कई बार दवा खिड़की बंद मिलने से मरीजों को बिना दवा के ही बैरंग लौटना पड़ रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज ओपीडी में उपचार कराने पहुंचते हैं। डॉक्टरों द्वारा दवा लिखे जाने के बाद जब मरीज दवा वितरण कक्ष पहुंचते हैं तो वहां फार्मासिस्ट न होने या कम स्टाफ होने के कारण भारी अव्यवस्था देखने को मिलती है। बुजुर्गों,महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भीषण गर्मी व धूप में दवा की एक-एक खुराक के लिए कई घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। फार्मासिस्ट के न होने से दवाओं के रखरखाव, वितरण और सही खुराक बताने का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सरकारी अस्पताल में मुफ्त मिलने वाली दवाइयों के बजाय मरीजों को बाहर से आर्थिक बोझ उठाकर दवाइयां लेनी पड़ रही हैं। मौजूद सीमित स्टाफ पर काम का बोझ इतना अधिक है कि वे चाहकर भी व्यवस्था को संभाल नहीं पा रहे हैं।
प्रशासनिक उपेक्षा पर उठते सवाल
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि गुरसरांय सीएचसी क्षेत्र का एक मुख्य स्वास्थ्य केंद्र है, जिससे दर्जनों गांव जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा यहां खाली पड़े फार्मासिस्ट के पदों पर नियुक्ति न करना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। कई बार उच्च अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
जल्द समाधान की मांग
क्षेत्रीय जनता ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी और उच्च स्वास्थ्य अधिकारियों से मांग की है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसरांय में प्राथमिकता के आधार पर पर्याप्त संख्या में फार्मासिस्टों की तैनाती की जाए, ताकि आम जनता को सुचारू रूप से स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें और उन्हें प्राइवेट मेडिकल स्टोरों के चक्कर न काटने पड़ें।




