*राजनांदगांव कलेक्टरेट में गूंजे नारे:
गौ माता को 'राष्ट्र माता' घोषित करने और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर सौंपा गया ज्ञापन*

*राजनांदगांव कलेक्टरेट में गूंजे नारे: गौ माता को ‘राष्ट्र माता’ घोषित करने और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर सौंपा गया ज्ञापन*
*शेखर ठाकुर संपादक छत्तीसगढ़।*
राजनांदगांव | 15 अक्टूबर 2026
राजनांदगांव जिला कलेक्टरेट परिसर आज गौ भक्तों और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के नारों से गूंज उठा। अवसर था गौ माता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने और देश-प्रदेश में गौ हत्या पर पूर्णतः रोक लगाने की मांग को लेकर महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने का।

‘जय गोपाल’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों से गूंजा परिसर
हजारों की संख्या में उपस्थित गौ सेवकों और नागरिकों ने कलेक्टरेट पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान “गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करो”, “गौ हत्या बंद करो” और “गोवंश की रक्षा—देश की सुरक्षा” जैसे गगनभेदी नारों से पूरा कलेक्टरेट परिसर गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सनातन संस्कृति और भारतीय धरोहर में गौ माता का स्थान सर्वोपरि है, ऐसे में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान और संरक्षण मिलना अनिवार्य है।
प्रमुख मांगें: राष्ट्र माता का दर्जा और कठोर कानून
कलेक्टरेट पहुंचे शिष्टमंडल ने महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए मुख्य रूप से दो सूत्रीय मांगें रखीं:
राष्ट्र माता की घोषणा: केंद्र सरकार द्वारा गौ माता को आधिकारिक रूप से ‘राष्ट्र माता’ घोषित किया जाए।
गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध: सम्पूर्ण भारतवर्ष में गौवंश की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कड़े से कड़े केंद्रीय कानून का निर्माण और सख्ती से क्रियान्वयन हो।
संरक्षण और संवर्धन: आवारा घूम रहे गोवंश के लिए स्थायी गोशालाओं का निर्माण और उनके चारे-पानी की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व पर जोर
ज्ञापन सौंपने के उपरांत वक्ताओं ने कहा कि गौ माता केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय कृषि और संस्कृति की रीढ़ हैं। पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर) के औषधीय और वैज्ञानिक महत्व का हवाला देते हुए वक्ताओं ने कहा कि गोवंश का संरक्षण पर्यावरण संतुलन और मानव कल्याण दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए इसे नियमानुसार उच्चाधिकारियों तक प्रेषित करने का आश्वासन दिया। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें जिले के प्रबुद्ध नागरिकों, साधु-संतों और बड़ी संख्या में युवा गौ सेवक उपस्थित रहे।
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