बसंतगढ़ में अंबे माता मंदिर: आस्था, इतिहास और प्रकृति का संगम
आस्था, परंपरा और प्रकृति का अद्भुत संगम

रिपोर्ट:-सुरेश चौहान (9571081159)
पिंडवाड़ा (सिरोही)। अरावली पर्वतमाला की सुरम्य वादियों में बसे बसंतगढ़ क्षेत्र का अंबे माता मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि अपने गौरवशाली इतिहास, प्राचीन परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है।
मंदिर को एक प्राचीन शक्तिपीठ माना जाता है, जहां माता अंबे के साक्षात विराजमान होने की मान्यता है। यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन लगा रहता है। मंदिर में महंत श्री 1008 कृष्णदास जी महाराज द्वारा नियमित पूजा-अर्चना की जाती है। विशेष परंपरा के अनुसार, हर माह शुक्ल पक्ष की दशमी को रात्रि 12 बजे बसंतगढ़ के राव स्वरूप सिंह द्वारा विशेष पूजा की जाती है, जिसे माता का प्रतिष्ठा दिवस माना जाता है।
नवरात्रि के दौरान मंदिर में आस्था का विशेष माहौल देखने को मिलता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में हजारों श्रद्धालु दूर-दराज से यहां पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से गूंज उठता है।
बसंतगढ़ का इतिहास मेवाड़ के महान शासक राणा कुंभा से जुड़ा हुआ है। उनके शासनकाल में इस क्षेत्र का विशेष महत्व रहा था। यहां स्थित किले और धार्मिक स्थल आज भी उस ऐतिहासिक विरासत की झलक प्रस्तुत करते हैं। साथ ही, प्राचीन समय में यह क्षेत्र तांबे की खदानों के लिए भी जाना जाता था, जो उस समय की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं।
प्राकृतिक दृष्टि से भी यह स्थान अत्यंत आकर्षक है। मंदिर के आसपास बहने वाली नदी और अरावली की हरियाली इसे रमणीय बनाती है। विशेष रूप से बरसात के मौसम में यहां का दृश्य पर्यटकों और श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
अंबे माता मंदिर के अलावा बसंतगढ़ में भटेश्वर महादेव, ब्रह्मा जी, सूर्य भगवान, क्षेमकरी माता, गणेश जी, विष्णु भगवान और दुर्ग स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर जैसे कई प्रमुख धार्मिक स्थल भी स्थित हैं।
आवागमन की दृष्टि से बसंतगढ़ नेशनल हाईवे से करीब 4 किलोमीटर और रेलवे मार्ग से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित है। पिंडवाड़ा से यहां तक ऑटो रिक्शा की सुविधा उपलब्ध है, जिससे श्रद्धालु आसानी से मंदिर पहुंच सकते हैं।
इस प्रकार, बसंतगढ़ का अंबे माता मंदिर आस्था, इतिहास, परंपरा और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है, जो इसे क्षेत्र की विशेष पहचान बनाता है।


