सरकारी दारू भट्टी के गेट पर ही अवैध पैकारी का खेल
पुलिस चौकी से महज 500 मीटर दूर खुलेआम उड़ रही नियमों की धज्जियां
क्राइम रिपोर्टर संगीता सिंह राजनंदगांव:
सरकारी दारू भट्टी के गेट पर ही अवैध पैकारी का खेल, पुलिस चौकी से महज 500 मीटर दूर खुलेआम उड़ रही नियमों की धज्जियां
राजनंदगांव।
नियम-कानून को ताक पर रखकर अवैध कारोबार करने वालों के हौसले कितने बुलंद हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण राजनंदगांव के गठुला में देखने को मिल रहा है। यहाँ स्थित सरकारी शराब दुकान (लाइसेंस वाली भट्टी) के ठीक मुख्य द्वार पर ही अवैध शराब की बिक्री और पैकारी का खुला खेल चल रहा है। सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि इस पूरे गोरखधंधे से महज 500 मीटर की दूरी पर पुलिस चौकी मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार महकमे की ‘कार्रवाई’ शून्य है।
लाइसेंस की आड़ में समानांतर ‘अवैध अड्डा’
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गठुला स्थित सरकारी देसी/विदेशी शराब भट्टी के परिसर और उसके गेट को ही अवैध शराब बेचने वालों ने अपना सुरक्षित ठिकाना बना लिया है। सरकारी दुकान से थोक में शराब निकालकर गेट पर ही अधिक दामों में या तय समय के बाद भी अवैध रूप से परोसने का काम धड़ल्ले से जारी है।
स्थिति यह है कि आम लोगों को यह समझ नहीं आता कि सरकारी भट्टी कहाँ खत्म हो रही है और अवैध शराब का अड्डा कहाँ से शुरू हो रहा है। लाइसेंस की आड़ में यह समानांतर काला कारोबार फल-फूल रहा है।
‘सफेद हाथी’ साबित हो रही पास की पुलिस चौकी
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल कानून व्यवस्था पर खड़ा होता है। शराब भट्टी से मात्र 500 मीटर की दूरी पर पुलिस चौकी स्थित है। दिनभर पुलिस कर्मियों की आवाजाही वाले इस मार्ग पर खुलेआम अवैध पैकारी होना, पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।
खुला नजारा: भट्टी के सामने सुबह से लेकर देर रात तक पियक्कड़ों और अवैध विक्रेताओं का जमावड़ा लगा रहता है।
मूकदर्शक प्रशासन: स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस और आबकारी विभाग को इसकी पूरी जानकारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति या पूरी तरह से चुप्पी साध ली गई है।
राहगीर और ग्रामीण परेशान, सुरक्षा भगवान भरोसे
इस अवैध अड्डे के कारण गठुला क्षेत्र के आसपास का माहौल पूरी तरह दूषित हो चुका है। भट्टी के सामने मुख्य सड़क पर हर वक्त असामाजिक तत्वों का डेरा रहता है, जिससे यहाँ से गुजरने वाली महिलाओं, स्कूली बच्चों और राहगीरों को भारी मानसिक प्रताड़ना और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। आए दिन यहाँ गाली-गलौज और विवाद की स्थिति निर्मित होती रहती है।
बड़ा सवाल: आखिर संरक्षण किसका?
जनता अब सीधे तौर पर प्रशासन से सवाल पूछ रही है:
सरकारी भट्टी के गेट पर अवैध रूप से शराब बेचने की हिम्मत इन पैकारों में कहाँ से आ रही है?
क्या आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की नाक के नीचे चल रहे इस खेल को ‘मौन स्वीकृति’ मिली हुई है?
आखिर कब कुंभकर्णी नींद से जागेगा आबकारी अमला और कब होगी इन अवैध अड्डों पर बड़ी कार्रवाई?
अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी मामले को संज्ञान में लेकर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं, या फिर हमेशा की तरह ‘कार्रवाई शून्य’ का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।
