औद्योगिक डस्ट से परेशान ग्रामीण,
स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव
औद्योगिक डस्ट से परेशान ग्रामीण, स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
ग्राम रसमड़ा स्थित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाली धूल को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर चिंता जताई है। ग्रामीणों का आरोप है, कि प्लांट्स से उड़ने वाली औद्योगिक डस्ट के कारण क्षेत्र में स्वास्थ्य और आवागमन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, प्लांट से निकलने वाली धूल नेशनल हाईवे तक फैल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धूल के कारण हाईवे पर दिखाई देने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट का उपयोग करना पड़ता है। ग्रामीणों ने रात्रि के समय प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
वहीं प्लांट के पीछे की सार्वजनिक सड़क को लेकर ग्रामीणों का आरोप है कि वहां फ्लाई ऐश और कोल डस्ट की परत जमी रहती है। राहगीरों का कहना है कि इस मार्ग से गुजरने पर आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और त्वचा पर खुजली की समस्या हो रही है। बच्चों और मजदूरों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि घरों, बर्तनों और पीने के पानी में भी धूल की परत जम रही है। उनका कहना है कि पिछले कुछ सालों में गांव में श्वसन और चर्म रोग से संबंधित शिकायतें बढ़ी हैं। पर्यावरण संरक्षण मंडल ( सीईसीबी) के नियमानुसार किसी भी प्लांट की बाउंड्री से फ्यूजिटिव एमिशन यानी अनियंत्रित धूल का बाहर जाना प्रतिबंधित है। ग्रामीणों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने कलेक्टर दुर्ग और सदस्य सचिव, छ.ग. पर्यावरण संरक्षण मंडल रायपुर से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।



