संविधान हत्या दिवस एवं आपातकाल की 51वीं बरसी पर प्रबुद्ध जन सम्मेलन एवं गोष्ठी आयोजित
संविधान हत्या दिवस एवं आपातकाल की 51वीं बरसी पर प्रबुद्ध जन सम्मेलन एवं गोष्ठी आयोजित

संविधान हत्या दिवस एवं आपातकाल की 51वीं बरसी पर प्रबुद्ध जन सम्मेलन एवं गोष्ठी आयोजित

तिलक राम पटेल महासमुंद ब्यूरोचिफ भारत संवाद टीवी न्यूज चैनल दैनिक अपडेट अखबार
लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को किया गया नमन

महासमुंद। संविधान हत्या दिवस एवं आपातकाल की 51वीं बरसी के अवसर पर स्वाध्याय केंद्र महासमुंद में प्रबुद्ध जन सम्मेलन एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र, संविधान एवं नागरिक अधिकारों पर हुए प्रहार तथा लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष एवं बलिदान को स्मरण किया गया एवं मिसा बंदी सेनानियों को सम्मान किया गया ।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भाजपा प्रदेश मंत्री अमित साहू ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। सत्ता बचाने के लिए संविधान की मूल भावना को कुचलने का प्रयास किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन किया गया। हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेलों में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों ने यातनाएं सहन कीं, लेकिन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। लोकतंत्र सेनानियों के त्याग और बलिदान के कारण ही देश में पुनः लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हो सकी। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को आपातकाल की वास्तविकता से परिचित कराना आवश्यक है ताकि लोकतंत्र और संविधान के महत्व को समझा जा सके।
गोष्ठी में आपातकाल के चश्मदीद साक्षी एवं लोकतंत्र सेनानी मनीराम चंद्राकर ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन की घटनाओं को साझा करते हुए बताया कि आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर छह माह से अधिक समय तक जेल में रखा गया। उन्होंने कहा कि विवाह के मात्र 16वें दिन उन्हें जेल भेज दिया गया था। नवविवाहित जीवन की खुशियां शुरू भी नहीं हो पाई थीं कि उन्हें लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष के कारण परिवार से दूर रहना पड़ा। उन्होंने बताया कि जेल में रहते हुए अनेक प्रकार की मानसिक एवं शारीरिक यातनाएं झेलनी पड़ीं, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित के प्रति उनका संकल्प कभी कमजोर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि उस समय हजारों परिवारों ने कठिनाइयों का सामना किया, परंतु लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष जारी रखा। उनके संस्मरणों ने उपस्थित जनों को भावुक कर दिया तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए संघर्षों की याद ताजा कर दी।
इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानी स्वर्गीय अमृत साहू के संघर्षों का उल्लेख करते हुए उनकी धर्मपत्नी उर्मिला अमृत साहू ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अमृत साहू मीसाबंदी रहे और आपातकाल के दौरान परिवार को अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। परिवार के मुखिया के जेल में रहने के कारण आर्थिक, सामाजिक और मानसिक चुनौतियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि उस दौर में परिवारों ने भी उतना ही संघर्ष और पीड़ा सहन की, जितनी जेल में बंद लोकतंत्र सेनानियों ने झेली। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिया गया वह त्याग आज भी प्रेरणा प्रदान करता है और आने वाली पीढ़ियों को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष येतराम साहू ने कहा कि 25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल ने संविधान की मूल भावना, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि संविधान हत्या दिवस केवल इतिहास को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का भी अवसर है। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के त्याग और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को उस दौर की वास्तविकता से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री थानसिंह दीवान ने किया तथा अंत में जितेन्द्र त्रिपाठी कार्यक्रम के संयोजक प्रदीप चंद्राकर ने उपस्थित सभी अतिथियों, प्रबुद्धजनों, लोकतंत्र सेनानियों एवं कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर जिले भर से जनप्रतिनिधि, प्रबुद्धजन, वरिष्ठ नागरिक,समाजसेवी,समाजप्रमुख तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए संविधान एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने का संकल्प लिया गया।
