भारत का पहला बायो एंजाइम उर्वरक ‘एसेंस गोल्ड’ लॉन्च, खेती में नई क्रांति की उम्मीद*
भारत का पहला बायो एंजाइम उर्वरक ‘एसेंस गोल्ड’ लॉन्च, खेती में नई क्रांति की उम्मीद*

*भारत का पहला बायो एंजाइम उर्वरक ‘एसेंस गोल्ड’ लॉन्च, खेती में नई क्रांति की उम्मीद*

तिलक राम पटेल महासमुंद ब्यूरोचिफ भारत संवाद टीवी न्यूज चैनल दैनिक अपडेट पेपर
पिथौरा/कैलाशपुर। कृषि क्षेत्र में नवाचार और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पिथौरा विकासखंड के ग्राम कैलाशपुर में भारत के पहले बायो एंजाइम आधारित उर्वरक ‘एसेंस गोल्ड’ का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर कंपनी के सीएमडी सर सुधाकर नायक, छत्तीसगढ़ फाउंडर लीडर दीनबंधु नायक तथा वरिष्ठ पत्रकार तिलक राम पटेल के बीच सौजन्य मुलाकात हुई और किसानों के हित में कृषि विकास एवं आधुनिक तकनीकों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम में उपस्थित कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि एसेंस गोल्ड एक अत्याधुनिक जैव उर्वरक है, जो प्राकृतिक एंजाइम तकनीक पर आधारित है। यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने, पौधों की जड़ों को मजबूत करने तथा फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन क्षमता में वृद्धि करने में सहायक सिद्ध हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह उत्पाद रासायनिक उर्वरकों के प्रभावी एवं सुरक्षित विकल्प के रूप में उभरने की क्षमता रखता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि एसेंस गोल्ड की प्रमुख विशेषताओं में उच्च गुणवत्ता, शुद्धता, नवाचार तथा सतत कृषि विकास शामिल हैं। यह मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों को सक्रिय कर फसलों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण, भूमि की उत्पादकता बढ़ाने और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने में भी उपयोगी माना जा रहा है।
कंपनी प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि इस उत्पाद का उद्देश्य किसानों की खेती लागत को कम करना, उत्पादन बढ़ाना तथा प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है। यह उर्वरक धान, गेहूं, दलहन, तिलहन, सब्जियों और फलदार फसलों सहित विभिन्न कृषि फसलों के लिए लाभकारी बताया गया है।
लॉन्च कार्यक्रम में शामिल किसानों ने इस नई तकनीक का स्वागत करते हुए आशा जताई कि यदि यह उत्पाद अपने दावों के अनुरूप परिणाम देता है, तो किसानों की आय में वृद्धि होगी और खेती अधिक लाभकारी बन सकेगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ‘एसेंस गोल्ड’ भारतीय कृषि क्षेत्र में एक नई दिशा देने वाला उत्पाद साबित हो सकता है। प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक उन्नति के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
