*भिलाई-चरौदा निगम में पसरा सन्नाटा और आक्रोश,
3 महीने से वेतन नहीं मिलने पर कर्मचारियों का हंगामा: आयुक्त की कार्यशैली पर उठे सवाल*

*भिलाई-चरौदा निगम में पसरा सन्नाटा और आक्रोश, 3 महीने से वेतन नहीं मिलने पर कर्मचारियों का हंगामा: आयुक्त की कार्यशैली पर उठे सवाल*
*संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव*
भिलाई-चरौदा। भिलाई-चरौदा नगर पालिका निगम में इन दिनों अव्यवस्था और अनियमितताओं का अंबार लगा हुआ है। आर्थिक तंगी और प्रशासनिक लचरता का खामियाजा सीधे तौर पर निगम के कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। बीते तीन महीनों से वेतन न मिलने से आक्रोशित कर्मचारियों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया, जिससे निगम कार्यालय में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई।
बकाया वेतन को लेकर आयुक्त से सीधी भिड़ंत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कल नगर निगम कार्यालय में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब अपनी बुनियादी मांगों और तीन महीने के बकाया वेतन को लेकर कर्मचारी एकजुट होकर आयुक्त के कक्ष में पहुंचे। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बार-बार गुहार लगाने और आश्वासन मिलने के बावजूद उनके खाते में एक भी रुपया नहीं आया है। परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बातचीत के दौरान माहौल इतना गरमा गया कि कर्मचारियों और आयुक्त के बीच तीखी बहस हो गई। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि उनका हक समय पर नहीं दिया जा सकता, तो वे काम करने को मजबूर नहीं हैं।
आयुक्त और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने निगम की कार्यप्रणाली और आयुक्त की प्रशासनिक क्षमता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या निगम में वित्तीय कुप्रबंधन इस कदर हावी हो चुका है कि कर्मचारियों के मानदेय तक के पैसे खत्म हो गए हैं?
स्थानीय लोगों और निगम के कर्मचारियों के बीच अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि “या तो निगम की कार्यशैली पूरी तरह से चरमरा चुकी है या फिर जिम्मेदार अधिकारी स्थिति को संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।”
विकास कार्य ठप, जनता भी परेशान
कर्मचारियों के असंतोष और प्रशासनिक गतिरोध का सीधा असर शहर की व्यवस्थाओं पर पड़ने लगा है। सफाई व्यवस्था, जलापूर्ति और अन्य आवश्यक नागरिक सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। यदि जल्द ही कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में निगम क्षेत्र में बड़ा जन-आंदोलन या हड़ताल देखने को मिल सकती है।
अब देखने वाली बात होगी कि शासन और प्रशासन इस बिगड़ती व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है, या फिर भिलाई-चरौदा की जनता और कर्मचारी इसी तरह बदहाली का शिकार होते रहेंगे।