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यूपी

मुख्यमंत्री ने दी बड़ी सौगात, उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का किया शुभारंभ

अकेला नहीं है आउटसोर्स कर्मी, उसकी समस्या को सुनने का भी बन गया तंत्र- मुख्यमंत्री जी

ब्यूरो चीफ आयुष त्रिपाठी 

सीएम योगी ने यूपी कॉस के पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग की, लोगो का भी किया अनावरण

सिर्फ साढ़े तीन लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों का ही नहीं, बल्कि पारिवारिक सदस्यों समेत 17-20 लाख लोगों का भी होगा हित

पांच तारीख तक सीधे अकाउंट में जाएगा पारिश्रमिक- मुख्यमंत्री

व्यक्ति की कृपा पर नहीं, बल्कि श्रेणी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप सुनिश्चित होगा पारिश्रमिक

घटना-दुर्घटना, आपदा का शिकार होने पर निर्धारित श्रेणी के अनुसार परिवार को मिलेगा 20 से 50 लाख तक दुर्घटना बीमा कवर

महिला समृद्धि के कार्यों में जनपद झांसी के मिल्क प्रोड्यूसर का जिक्र किया

झांसी। मा0 मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों को बुधवार को बड़ी सौगात दी। उन्होंने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ किया। साथ ही यूपी कॉस के पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग की और लोगो का भी अनावरण किया। सीएम ने कहा कि निगम बनने से साढ़े तीन लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों व पारिवारिक सदस्यों समेत 17-20 लाख लोगों का हित होगा।

आउटसोर्स कर्मचारियों की गरिमा, गौरव को स्थापित करने का प्रयास है निगम

सीएम ने साढ़े 9 वर्ष में यूपी की विकास यात्रा का श्रेय नगर निकाय कर्मियों, पंप ऑपरेटरों, सचिवालयों, चिकित्सालयों, शासन व्यवस्था से जुड़े परमानेंट, संविदा और आउटसोर्स कर्मियों को दिया। कहा कि ऐसे में शासन की जिम्मेदारी है कि व्यक्ति को गरिमा के अनुरूप सम्मान प्राप्त हो। सरकार का प्रयास उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के जरिए गरिमा, गौरव को स्थापित करना है।

सरकार ने समझी पीड़ा, दूर की चिंता

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की व्यवस्था तीन खेमों में बंटी थी। एक तरफ कार्मिक, दूसरी तरफ एजेंसी और तीसरी तरफ सरकारी विभाग होता था। कर्मचारी समस्या लेकर अलग-अलग दरवाजों पर जाता था, लेकिन सुनवाई नहीं होती थी। वेतन की चिंता, सामाजिक सुरक्षा, सेवा संबंधी सुरक्षा की गारंटी भी नहीं थी। तब इन कर्मियों का प्रश्न होता था कि आखिर मेरी पीड़ा कौन सुनेगा, मेरे परिवार की चिंता कौन करेगा।

आउटसोर्स कर्मी अब अकेला नहीं है, बल्कि उसकी समस्या को सुनने का भी तंत्र बन गया

मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार और कर्मचारी का रिश्ता केवल वेतन और कार्य का नहीं हो सकता, वह विश्वास और जिम्मेदारी का होता है। हमारा मानना है कि कर्मचारी का जीवन कागजों व कार्यालयों के चक्कर में न बीते बल्कि उसका समय कर्तव्य के लिए लगे और शेष समय परिवार, बच्चों के भविष्य के लिए व्यतीत हो। कर्मचारी को महसूस होना चाहिए कि उसके बेहतर काम का रिकॉर्ड और अधिकारों को सुरक्षित रखा जा रहा है। वह अकेला नहीं है, बल्कि उसकी समस्या को सुनने का भी अब तंत्र है। उसे समय से वेतन मिले, भविष्य निधि, बीमा से जुड़े अधिकार सुरक्षित रहे और हर आउटसोर्स कर्मी को मेहनत के अनुरूप सरकार की व्यवस्था से मानदेय प्राप्त हो।

सामाजिक भेदभाव दूर करने के लिए आर्थिक भेदभाव भी दूर हो

मा0 सीएम ने कहा कि जब कर्मचारियों से मानदेय पूछते थे तो कोई 8000, 11000 बताता था। जो 9000 बताते थे, उन्हें 6000 ही मिलता था। हमारा मानना है कि सामाजिक भेदभाव दूर करने के लिए आर्थिक भेदभाव भी दूर किया जाना चाहिए। व्यक्ति को मेहनत का उचित मानदेय मिलना ही श्रम का सम्मान है। उसे सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, बल्कि घटना-दुर्घटना पर उसके साथ कवर भी हो।

व्यक्ति की कृपा पर नहीं, बल्कि मेहनत से प्राप्त होगा अधिकार

मा0 सीएम ने कहा कि महाकुंभ के अवसर पर इसकी घोषणा की गई थी। साढ़े तीन लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मी हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षा, स्वास्थ्य व मानदेय की गारंटी नहीं थी। घटना-दुर्घटना पर कोई पूछता नहीं था। हमारी सरकार ने संवेदनशीलता को सुशासन की पहली शर्त मानते हुए आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया। इसके माध्यम से संस्थागत सुरक्षित भविष्य प्राप्त होगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद अधिकार किसी व्यक्ति की कृपा पर नहीं, बल्कि मेहनत से प्राप्त होगा। व्यवस्था बिचौलियों पर नहीं होगी। पोर्टल पर सारी जानकारी उपलब्ध होगी। अब कर्मचारी अकेला नहीं है, बल्कि निगम साथ होगा।

निगम के माध्यम से 20 लाख लोगों को प्रदान करना चाहते हैं सुरक्षा कवर

मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहाकि जब किसी को समय पर अधिकार मिलता है तो उसका लाभ केवल एक व्यक्ति को नहीं मिलता। बच्चे की पढ़ाई, मां की दवाई, बेटी का भविष्य और परिवार को भरोसा मिलता है कि मेहनत बेकार न जाएगी। सरकार निगम के माध्यम से 20 लाख लोगों को सुरक्षा कवर प्रदान करना चाहती है। अब सरकारी विभाग-आउटसोर्स एजेंसी व कर्मचारी आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक आधारित व्यवस्था से जुड़ जाएंगे। मैनपावर की आवश्यक्ता आंकलन, रिक्तियों का पूर्वानुमान व मानव संसाधन की योजना बनाई जा सकेगी।

श्रेणी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप सुनिश्चित होगा पारिश्रमिक

मा0 सीएम ने कहाकि राज्य सरकार की आरक्षण नीतियों के अनुरूप योग्यता व मेरिट के आधार पर भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन व पारदर्शी होगी। भर्ती, पोस्टिंग, उपस्थिति, वेतन, ग्रेच्युटी, बीमा व सर्विस के लाभ की डिजिटल मॉनिटरिंग भी होगी। कर्मचारी अब सर्विस डिटेल, अकाउंट, उपस्थिति, पेमेंट व डिटेक्शन एक ही जगह देख सकेगा। यहीं शिकायत दर्ज कराकर वह समय से निराकरण भी पा सकेगा। श्रेणी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप प्रत्येक कर्मचारी का पारिश्रमिक भी सुनिश्चित होगा।

पांच तारीख तक अकाउंट में चला जाएगा पारिश्रमिक

मा0 सीएम ने कहा कि पहली से पांच तारीख तक सीधे अकाउंट में पारिश्रमिक जाएगा। नियमित रूप से ईपीएफ व ईएसआई का अंशदान भी जमा होगा। सरकार आउटसोर्स एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, वे कर्मचारी के पैसे से कटौती नहीं सकेंगे। कर्मचारियों को ईपीएफ का भी लाभ मिलेगा। कंपनी आउटसोर्स कर्मी अब निकाल नहीं सकेगी। वह पहले सरकार को बताएगी, उसकी जांच होगी। यदि कंपनी की रिपोर्ट गलत हुई तो कर्मचारी का उत्पीड़न नहीं हो पाएगा।

मातृत्व अवकाश सहित सभी वैधानिक सेवा लाभ भी सुनिश्चित होगा

मा0 सीएम ने कहा कि हम ईएसआई का पैसा ईएसआई के अस्पतालों में फ्री उपचार के लिए देंगे, यदि वहां सुविधा नहीं मिली तो आयुष्मान भारत की सुविधा से जोड़ेंगे। इससे आउटसोर्स कर्मी व परिवार को पांच लाख स्वास्थ्य बीमा का कवर भी मिलेगा। मातृत्व अवकाश सहित सभी वैधानिक सेवा लाभ भी सुनिश्चित होगा।

घटना-दुर्घटना, आपदा का शिकार होने पर निर्धारित श्रेणी के अनुसार परिवार को मिलेगा 20 से 50 लाख तक दुर्घटना बीमा कवर

मा0 सीएम ने आउटसोर्स सेवा निगम के साथ एसबीआई के एमओयू का भी जिक्र किया। बताया कि मानदेय सीधे बैंक में जाएगा और घटना-दुर्घटना, आपदा का शिकार होने पर निर्धारित श्रेणी के अनुसार 20 से 50 लाख तक दुर्घटना बीमा कवर परिवार को मिलेगा। अग्निकांड का शिकार होने पर 10 लाख, आकस्मिक दवा के लिए पांच लाख, आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस की सुविधा के लिए 10 लाख, बेटे की शिक्षा के लिए 8 लाख व बेटी की शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक मिलेगा। दो पुत्रियों के विवाह के लिए 8-10 लाख तक तथा किसी कर्मचारी की मृत्यु पर बैंक के माध्यम से निगम परिजनों को तत्काल 50 हजार रुपये उपलब्ध कराएगा। जीरो बैलेंस पर खाता खुलेगा और इसके माध्यम से परिवार के चार सदस्यों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। अब आउटसोर्स कर्मचारियों को ऑर्गनाइज्ड, स्किल्ड, सिक्योर व डिग्निफाइड वर्कफोर्स में बदलने का निगम प्रारंभ हो रहा है।

टेक्नोलॉजी जितना आगे जाएगी, गवर्नेंस को उतना अधिक मानवीय होना पड़ेगा

मा0 सीएम ने कहा कि ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, ऑटोमेशन व नई अर्थव्यवस्था के दौर में कार्य की प्रकृति बदल रही है, लेकिन मानव के श्रम की गरिमा कभी नहीं बदलेगी। टेक्नोलॉजी जितना आगे जाएगी, गवर्नेंस को उतना अधिक मानवीय होना पड़ेगा। संवेदना पहचान बननी चाहिए। 9 वर्ष में डबल इंजन सरकार ने भय-अराजकता से मुक्ति दिलाई तो पारदर्शिता के साथ नई कार्य संस्कृति को भी बढ़ाया। कानून व्यवस्था सुधरी तो सामान्य परिवार का विश्वास बढ़ा, बिजली व पानी पहुंचा तो घरों की जिंदगी बदली, सड़कें बनीं तो गांव और बाजार की दूरी भी कम हुई। डीबीटी ने गरीबों का हक सीधे खाते में पहुंचाया। व्यवस्था के किनारे खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाया गया। यूपी की अर्थव्यवस्था में किसान, नौजवान, महिला शक्ति, कारीगर, रेहड़ी-पटरी, मेहनतकश नागरिक, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम से जुड़े उद्यमी, स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा से लेकर सरकारी कर्मचारी और र आउटसोर्स कर्मचारी प्रदेश के लिए मजबूत भागीदारी निभा रहे हैं।

कृषि अर्थव्यवस्था के उद्यमी भी बनें किसान

सरकार ने किसानों को बाजार, खेत को सड़क से जोड़ने, फसल को मंडी तक ले जाने की व्यवस्था दी। उसे तकनीक, सिंचाई, बीमा और सीधे भुगतान से जोड़ा। हमारी सोच है कि किसान सिर्फ खेती न करे, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था का मजबूत उद्यमी भी बने। 2017 से पहले कारीगरों में निराशा थी। पिछली सरकारों की अकर्मण्यता के कारण पीढ़ियों का धंधा चौपट हो चुका था। पीढ़ियों से कोई परिवार पीतल, कालीन, चिकनकारी, इत्र, लकड़ी पर कला उकेरता था तो किसी के हाथ में हुनर था, लेकिन बाजार उससे दूर था। डबल इंजन सरकार ने एक जनपद-एक उत्पाद योजना लागू की, उसे तकनीक, बाजार दिया। परिणामस्वरूप कारीगर को बाजार मिला तो हुनर प्रदेश में रोजगार लाया। रोजगार बढ़ा तो कारीगर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का हिस्सा भी बन गया।

अब दौड़ रहा है उत्तर प्रदेश

मा0 सीएम ने कहाकि पहले छोटे उद्यमी उद्यम लगाने, एनओसी के लिए दौड़ता था। हमने कहा कि एमएसएमई के लिए 1000 दिन में एनओसी लेना, पहले उद्यम लगाओ। अब 96 लाख एमएसएमई यूनिट में 3.15 करोड़ से अधिक लोग काम कर रहे हैं। हमने सिंगल विंडो सिस्टम बनाया। अब उत्तर प्रदेश दौड़ रहा है। हमने केवल सुरक्षा नहीं दी, बल्कि आर्थिक रूप से संपन्न बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।

महिला समृद्धि के लिए किए गए कार्यों को भी बताया

मा0 सीएम ने कई मिल्क प्रोड्यूसर का जिक्र किया, कहा कि यह झांसी, आगरा, लखनऊ, काशी, गोरखपुर, रायबरेली आदि जनपदों में सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। इससे 4 लाख बहनें इससे जुड़कर आत्मनिर्भरता की कहानी कह रही हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर लगभग 1 करोड़ महिलाएं प्रदेश की प्रगति को गति दे रही हैं। सुरक्षित आधी आबादी डिग्निफाइड व पारदर्शी वर्कप्लेस में कार्य करते हुए अर्थव्यवस्था को भी गति दे रही हैं। करोड़ों महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से जुड़ती हैं तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी बढ़ती है। लोक भवन लखनऊ में माननीय मुख्यमंत्री जी के कार्यक्रम के पश्चात जनपद झांसी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में अध्यक्ष जिला पंचायत श्री पवन गौतम,मेयर श्री बिहारीलाल आर्य, विधायक मऊरानीपुर डॉ0 रश्मि आर्या, विधायक गरौठा श्री जवाहरलाल राजपूत, सदस्य विधान परिषद श्री रामतीर्थ सिंघल, सदस्य विधान परिषद डॉ0 बाबूलाल तिवारी ने विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्सिंग कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विभिन्न विभागीय आउटसोर्सिंग कार्मिकों को डेमो चैक सहित कन्या विवाह सहायता योजना एवं मातृत्व शिशु एवं बालिका मदद योजना के लाभार्थियों को भी डेमो चेक वितरित किए। इस अवसर पर मण्डलायुक्त श्री बिमल कुमार दुबे, जिलाधिकारी श्री गौरांग राठी, मुख्य विकास अधिकारी श्री रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड, प्रशिक्षु आईएएस सुश्री मनीषा धारवे, अपर नगर आयुक्त श्री राहुल कुमार यादव, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व श्रीमती पल्लवी मिश्रा, अपर नगर मजिस्ट्रेट श्री संजय कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं संविदाकर्मियों के परिजन उपस्थित रहे।

आयुष त्रिपाठी

ब्यूरो चीफ झांसी

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