उत्तम क्षमा के साथ दशलक्षण पर्व का शुभारंभ
बरुआसागर स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने धोती दुपट्टे में आकर बड़े ही उत्साह से किया दशलक्षण पर्व का शुभारंभ


बरुआसागर | स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने धोती दुपट्टे में आकर बड़े ही उत्साह से किया दशलक्षण पर्व का शुभारंभ , उक्त अवसर पर आज प्रथम उत्तम क्षमा के दिन भगवान शांतिनाथ जी की शांतिधारा करने का सौभाग्य सुमेरचंद्र प्रदीपअलया, सिंघई सौरभ जैन शुभम जैन,शैलेश जैन समकित अलया,चौधरी राकेश हिमांशु जैन एवं उत्तम मांर्दव धर्म के दिवस शांतिधारा सिंघई प्रदीप कुमार सिं संदीप कुमार जैन,राकेश कुमार शुभम अलया,रजनी वैभव जैन मगरपुर,निर्मल कुमार निशांक अलया ने की ।
एवं रात्रि में संगीतमय आरती भक्तों ने झूमकर नृत्य करकर की आरती वरुण जैन,पीयूष भंडारी एवं अमित बैसाखियां के द्वारा कराई गई ।
उपरांत रात्रि मे प्रवचन करते हुए सांगानेर जयपुर से पधारे पंडित आदि शास्त्री ने कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप यदि हम जानना चाहते हैं तो सर्वप्रथम हमें अपने अंतरंग से कषायों को बाहर निकालना होगा और उत्तम क्षमा धर्म की बात की जाय तो हमें अपने अंदर से क्रोध भाव का त्याग करना होगा तत्पश्चात उत्तम क्षमा धर्म स्वतःही हमारे अंदर प्रकट हो जाएगा और हम धर्म की प्रथम सीढ़ी चढ़ पाएंगे।

क्रोध का कारण उपस्थित होते हुए भी क्रोध न करना ही उत्तम क्षमा धर्म है। यही क्षमा मनुष्य के जीवन का अलंकार है और यही उसे सच्चे अर्थों में धर्मात्मा बनाती है।
क्रोध मनुष्य की सबसे बड़ी दुर्बलता है, जो न केवल आत्मा को कलुषित करता है बल्कि समाज में अशांति का कारण भी बनता है। इसके विपरीत क्षमा का अभ्यास करने से व्यक्ति का अंतरंग निर्मल होता है और वह वास्तविक आनंद का अनुभव करता है। प्रवचन में दीपक जैन, रजनीश जैन,अमित जैन,राकेश जैन,अशोक मामा,संदीप सेठ,संजय बैसाखियां,आदि उपस्थित रहे एवं कार्यक्रम का संचालन दिगम्बर जैन पंचायत समिति के अध्यक्ष सिंघई संदीप जैन एवं महामंत्री विनोद जैन एडवोकेट ने किया |




