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केशकाल मेला में वर्षो के बाद हुई टेक्स वसुली

बिना रसीद के ले लिया गया पैसा

केशकाल मेला में वर्षो के बाद हुई टेक्स वसुली

 

रेट लिस्ट गायब,

 

बिना रसीद के ले लिया पैसा

 

 

केशकाल, जिला कोंडागांव।

 

केशकाल नगर पंचायत में प्रति वर्ष की भांति मेला का आयोजन किया गया है इस दौरान मेला स्थल में अव्यवस्था का आलम दिखाई दे रहा है, मेला परिसर में दुकानदारों, झूला संचालकों और छोटे व्यापारियों से मनमाने तरीके से टैक्स वसूली का आरोप सामने आ रहा हैं।

 

सबसे गंभीर बात यह है कि मेला स्थल पर कहीं भी अधिकृत रेट लिस्ट प्रदर्शित नहीं की गई है, जिससे वसूली पूरी तरह मनमानी नजर आ रही है। कई दुकानदारों ने आरोप लगाया है की 300 से 400 रुपये तक वसूले गए, लेकिन बदले में कोई पक्की रसीद नहीं दी गई।

 

कुछ व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अगर इस अवैध वसूली की शिकायत की जाती है, तो दुकान हटाने की धमकी दी जाती है, जिससे पूरे मेला परिसर का माहौल खराब हो गया है

 

मेला में मौजूद कुछ पार्षदों व सूत्रों के अनुसार 5 वर्ग फीट के हिसाब से टैक्स वसूली की जा रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह दर किस नियम के तहत तय की गई है और क्या यह नगर पंचायत के

अधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज भी है या नहीं। इससे पूरे मामले पर संदेह को गहरा दिया है ।

 

मामले की जानकारी लेने के लिए नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) से फोन के माध्यम से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया, जिससे नगर पंचायत की कार्य प्रणाली पर और सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

मेला परिसर में केवल वसूली ही नहीं, बल्कि मूलभूत सुविधाएं भी बदहाल हैं। पानी की टंकियां होने के बावजूद समय पर पानी नहीं भरा जा रहा है। सफाई और व्यवस्था के लिए पर्याप्त कर्मचारी भी मौके पर मौजूद नहीं दिखे। वहीं दुकानदारों को क्रमबद्ध नंबरिंग कर व्यवस्थित स्थान देने की व्यवस्था भी नदारद रही, जिससे अव्यवस्था और बढ़ गई है।

 

कानूनी रूप से देखें तो छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 127 के तहत नगर पंचायत को टैक्स लगाने का अधिकार है, लेकिन धारा 129 से 132 के अनुसार रेट लिस्ट का सार्वजनिक प्रदर्शन, हर वसूली पर पक्की रसीद देना और संपूर्ण रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। इसके बावजूद मेले में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वसूली किस आधार पर की जा रही है और क्या यह राशि नगर पंचायत के सरकारी खाते में जमा हो रही है या नहीं।

 

इस पूरे मामले को लेकर व्यापारियों और आम जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह अव्यवस्था, धमकी और जबरन वसूली जारी रही, तो आने वाले समय में वे केशकाल मेले का बहिष्कार करने पर मजबूर होंगे।

 

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और मेले की व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाए।

 

यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो केशकाल मेला अपनी पहचान खोकर अव्यवस्था, डर और भ्रष्टाचार का प्रतीक बन जाएगा।

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