संस्कारों से ही बनती है सफलता की नींव” — जया किशोरी

रिपोर्ट सुधीर बैसवार
बड़वाह। शिक्षा और संस्कारों के समन्वय का सशक्त संदेश देते हुए द रेवांचल हाइट्स स्कूल के भव्य उद्घाटन समारोह में प्रसिद्ध कथावाचक एवं मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी जी की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। यह विद्यालय पंचवटी श्रद्धा सबुरी ग्रुप द्वारा स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करना है। उनके आगमन से पूरे परिसर में उत्साह, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण निर्मित हो गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें जया किशोरी जी के साथ चंदा माहेश्वरी एवं मंगला जोशी उपस्थित रहीं।इस अवसर पर विद्यालय के डायरेक्टर वंश चोकड़ा जी ने स्कूल के विजन एवं मिशन का परिचय देते हुए बताया कि संस्थान का उद्देश्य आधुनिक शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास करना है।अपने प्रेरणादायक संबोधन में जया किशोरी ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की शुरुआत घर से होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल अंकों तक सीमित न रहकर जीवन मूल्यों और चरित्र निर्माण पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को समय दें, संवाद बनाए रखें और अपने आचरण से उन्हें संस्कार दें।
उन्होंने आगे कहा कि जीवन में सफलता के लिए अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक सोच अत्यंत आवश्यक हैं। असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ना ही वास्तविक सफलता का मार्ग है। साथ ही युवाओं को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का संदेश दिया।कार्यक्रम के दौरान विद्यालय प्रबंधन द्वारा जया किशोरी जी का आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर डायरेक्टर पुष्पेंद्र माहेश्वरी, मिलिन्द्र जोशी, परीक्षित जोशी एवं वंश चोकड़ा द्वारा उनका स्वागत किया गया।कार्यक्रम के अंत में डायरेक्टर परीक्षित जोशी जी ने सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। 
अंत में जोशी परिवार एवं चोकड़ा परिवार के सदस्यों द्वारा जया किशोरी जी को नर्मदेश्वर शिवलिंग स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट किया गया।इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर उनके विचारों को सुनते रहे।


