विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान में मनाया गया विश्व होम्योपैथी दिवस
अमित चावला /लखनऊ.

होम्योपैथी समग्र चिकित्सा पद्धति है:स्वामी मुक्तिनाथानन्द
विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के होम्योपैथी विभाग द्वारा रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, लखनऊ के सहयोग से डॉ. क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनिमैन की 271वीं जयंती के अवसर पर विश्व होम्योपैथी दिवस का गरिमामय एवं सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन “सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” विषय के अंतर्गत किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य जनसामान्य में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इसके वैज्ञानिक, सुरक्षित एवं किफायती स्वरूप को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में वक्ताओं ने होम्योपैथी की मूल अवधारणाओं, इसकी प्रभावशीलता तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर आज लखनऊ एवं आस-पास के मरीजों के लिए एक निःशुल्क होम्योपैथी चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया।
संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने “होम्योपैथी के माध्यम से सामंजस्यः सीमाओं से परे उपचार” विषय पर अपने प्रेरणादायक एवं विचारोत्तेजक संबोधन में कहा कि होम्योपैथी केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी समग्र चिकित्सा पद्धति है जो व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है। होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति कम लागत में सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार प्रदान करती है, जिससे यह समाज के सभी वर्गों के लिए सुलभ बनती है। साथ ही, यह पद्धति रोग के मूल कारण को समझकर उपचार करती है, जिससे रोग की पुनरावृत्ति की संभावना कम हो जाती है।
स्वामी जी ने आगे कहा कि “स्वास्थ्य केवल शारीरिक अवस्था नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन का भी प्रतीक है।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जब तक व्यक्ति के भीतर संतुलन और सामंजस्य स्थापित नहीं होगा, तब तक वास्तविक स्वास्थ्य की प्राप्ति संभव नहीं है। होम्योपैथी इसी समग्र दृष्टिकोण को अपनाते हुए व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व का उपचार करती है।
मुख्य अतिथि डा0 किरन कुमारी दास, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, लखनऊ मंण्डल ने अपने संबोधन में कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति विश्वभर में अपनी प्रभावशीलता के कारण तेजी से स्वीकार की जा रही है और यह भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूर्णतः सक्षम है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में भी यह पद्धति अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है, क्योंकि यह किफायती होने के साथ-साथ सुरक्षित भी है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में, जहां जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और मानसिक तनाव आम होता जा रहा है, वहां होम्योपैथी एक सुरक्षित, कोमल और दीर्घकालिक समाधान के रूप में उभर रही है। यह चिकित्सा पद्धति रोग के लक्षणों को दबाने के बजाय उसके मूल कारण को समझकर उपचार करती है, जिससे रोगी को स्थायी राहत प्राप्त होती है।
होम्योपैथी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित पाण्डेय ने अपने वक्तव्य में विभाग की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि होम्योपैथी विभाग ने अल्प समय में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसका श्रेय स्वामी मुक्तिनाथानन्द के सतत मार्गदर्शन, प्रेरणा एवं सहयोग को जाता है। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इसी क्रम में विश्व होम्योपैथी जागरूकता सप्ताह दिनांक 10 से 16 अप्रैल, 2026 तक आयोजित किया जायेगा।
उन्होंने आगे जानकारी दी कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के अंतर्गत डॉ. सौरभ श्रीवास्तव के नेतृत्व में नियमित रूप से चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें बड़ी संख्या में ग्रामीण लाभान्वित हो रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, संस्थान द्वारा अयोध्या धाम में निःशुल्क होम्योपैथी ओपीडी का सफल शुभारंभ किया गया है, जहां डॉ. शालिनी सिंह अपनी विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बी. के. सिंह ने आभार ज्ञापन प्रस्तुत किया।डॉ. सिंह ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को भी सुदृढ़ करते हैं।




