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विवेकआइकॉन 2026: ऐतिहासिक रहा एआई और नेत्र रोग विशेषज्ञों के समग्र विकास पर हुआ सम्मेलन

अमित चावला /लखनऊ.

 

विवेकआईकॉ‏न नेत्र चिकित्सा के जगत में एक क्रांतिकारी आयोजन है.इससे युवा नेत्र रोग विशेषज्ञों को एक नई दिशा मिलेगी. बदलते समय की मांग है कि एआई का प्रयोग अधिकाधिक हो- स्वामी मुक्तिनाथानंद

अमित चावला /लखनऊ.

लखनऊ. विवेकानंद पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान के नेत्र रोग विभाग द्वारा आयोजित विवेक आइकॉन 2026 अपने आप में अनूठा और ऐतिहासिक रहा.राजधानी लखनऊ में संभवत पहली बार किसी अस्पताल द्वारा युवा नेत्र रोग विशेषज्ञों के समग्र विकास एवं चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते एआई के प्रयोग पर इस तरह का आयोजन हुआ जिसमें पूरे अवध क्षेत्र से 116 प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिनमें रेजिडेंट्स, फेलो और वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ शामिल रहे।
विवेकआइकॉन पूरी तरह ने नेत्र रोग चिकित्सकों पर केंद्रित रहा जिसमें न केवल उनके भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा हुई बल्कि उनके समग्र विकास जिसमें उनके अपने क्षेत्र में आगे की विशेषज्ञता कैसे प्राप्त करें? एम एस या डीएनबी करने के बाद उन्हें आगे की रणनीति कैसे अपनानी है कि वह प्राइवेट अस्पताल में प्रैक्टिस करें या फिर किसी चैरिटेबल अस्पताल से जुड़कर अपने रिसर्च को आगे बढ़ते हुए सेवा भाव से मरीजों की चिकित्सा करें? ऐसे तमाम मुद्दों पर वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञों ने अपने अनुभव रेजिडेंट्स के साथ साझा कर उनका मार्गदर्शन किया।
विवेकआइकॉन की आयोजक डॉ. जिमी मित्तल ( विभागाध्यक्ष ,नेत्र रोग विभाग, विवेकानंद हॉस्पिटल) कहती हैं कि चिकित्सा जगत में युवा रेजिडेंट्स की कोई बात नहीं करता. इसी को ध्यान में रखते हुए युवा नेत्र रोग विशेषज्ञों की समिति (योसी )एवं विवेकानंद पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान के नेत्र रोग विभाग द्वारा विवेक आइकॉन की आवश्यकता को समझते हुए राजधानी में पहली बार ऐसा आयोजन किया गया है यह आयोजन वरिष्टों के साथ युवा डॉक्टर के बीच संवाद का एक माध्यम है साथ ही हमने चिकित्सा जगत में एआई के बढ़ते प्रयोग को देखते हुए नेत्र रोग चिकित्सा के क्षेत्र में भी एआई की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए रेजिडेंट डॉक्टर के लिए एक पूरे सत्र का आयोजन किया है।
विवेकआइकन में युवा रेजिडेंट्स के लिए वित्तीय प्रबंधन और अपने पेशे एवं व्यक्तिगत जीवन में कैसे सामंजस्य सामंजस्य बिठाना इस पर भी विशेषज्ञों के पैनल ने चर्चा की जिसमें प्रोफेसर विनीता सिंह (पूर्व विभागाध्यक्ष,केजीएमयू ),प्रोफेसर कुमुदिनी शर्मा (पूर्व विभागाध्यक्ष,पीजीआई ), डॉ. भारतेंदु अग्रवाल, डॉ. प्रगति गर्ग,डॉ. सुधीर श्रीवास्तव,डॉ. राजेश भाटिया शामिल रहे.
नेत्र रोग चिकित्सा में एआई के प्रयोग की जरूरत पर भी विशेषज्ञों ने चर्चा करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में चिकित्सा जगत में इसकी भूमिका और भी बढ़ेगी.एआई से हमारी कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है. ना ही एआई डॉक्टर का विकल्प बन सकता है.हमें एआई को चिकित्सा में अपना सहयोगी बनना है ताकि इसके माध्यम से हम अधिक से अधिक मरीजों की सेवा कर सके.एआई की उपयोगिता पर चर्चा के पैनल में प्रोफेसर विनीता सिंह,डॉ. जतिंदर,डॉ. राजेश भाटिया, डॉ. दिव्याकांत मिश्रा शामिल रहे।
विवेकानंद पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानंद ने विवेक आइकॉन 2026 के आयोजन पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में यह आयोजन एक क्रांतिकारी कदम है.इससे युवा नेत्र रोग विशेषज्ञों को एक नई दिशा मिलेगी.बदलते समय की मांग है कि एआई का प्रयोग अधिक हो इसके लिए नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एआई प्रयोग पर चर्चा एवं इसके कार्यान्वयन की आवश्यकता बहुत प्रासंगिक है।

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