रामकृष्ण मठ, लखनऊ में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव
अमित चावला लखनऊ से विशेष रिपोर्ट

रामकृष्ण मठ, निराला नगर, लखनऊ में गुरु पूर्णिमा महोत्सव अत्यन्त श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर प्रातःकाल से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं भक्तों का आगमन होता रहा। सम्पूर्ण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण रामकृष्ण मठ, लखनऊ के आधिकारिक यूट्यूब चौनल के माध्यम से किया गया, जिससे देश-विदेश के श्रद्धालु भी कार्यक्रम से जुड़े।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मठ के द्वार भक्तों के लिए प्रातः से दोपहर 12 बजे तक तथा पुनः सायं 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक खुले रहे। जिन श्रद्धालुओं का जप-यज्ञ हेतु समय दोपहर 12बजे से सायं 4 बजे के मध्य पूर्व निर्धारित था, उन्हें उनके निर्धारित समयानुसार मठ परिसर में प्रवेश की व्यवस्था प्रदान की गई।
प्रातः 4ः30 बजे मंगल आरती, प्रार्थना, उदयास्त जप-यज्ञ (पुराने मंदिर एवं ऑनलाइन), वेदपाठ, विशेष पूजा तथा चण्डीपाठ का आयोजन हुआ। चण्डीपाठ का पाठ स्वामी वेदांगानन्दजी द्वारा किया गया।
प्रातः 7ः15 बजे मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज ने ऑनलाइन विशेष सत्संग में ‘श्रीरामकृष्ण ही जगद्गुरु हैं’’ विषय पर अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जगत्गुरु वह है जो सम्पूर्ण मानवता का मार्गदर्शक हो। श्रीरामकृष्ण ने विभिन्न धर्मों का स्वयं साधना एवं अनुभव करके यह सिद्ध किया कि सभी धर्म अंततः एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं। वे केवल उपदेश देने वाले गुरु नहीं थे, बल्कि अपने प्रत्येक उपदेश को स्वयं जीवन में उतारकर उसके पश्चात ही दूसरों को मार्गदर्शन देते थे।
स्वामीजी ने कहा कि श्रीरामकृष्ण प्रत्येक शिष्य की प्रकृति, क्षमता एवं आध्यात्मिक स्तर को भली-भाँति समझते थे तथा उसी के अनुरूप उनका मार्गदर्शन करते थे। उन्होंने किसी की स्वाभाविक प्रवृत्ति का दमन नहीं किया, बल्कि प्रेम, करुणा एवं प्रोत्साहन के माध्यम से प्रत्येक शिष्य के व्यक्तित्व का विकास किया। उन्होंने अपने शिष्यों में विवेक, वैराग्य, आत्मसंयम एवं ध्यान की भावना को विकसित कर उन्हें समाज एवं राष्ट्र के लिए आदर्श व्यक्तित्व बनाया।
उन्होंने आगे कहा कि यद्यपि श्रीरामकृष्ण को स्वयं कभी गुरु होने का अहंकार नहीं था, तथापि उनका सम्पूर्ण जीवन मानवता के आध्यात्मिक उत्थान के लिए समर्पित रहा। विवेकचूड़ामणि के श्लोक ‘‘उपसीदेद् गुरुं प्राज्ञं यस्माद् बन्धविमोक्षणम’’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु वही है जो जीव को अज्ञान एवं बन्धनों से मुक्त कर परमात्मा की ओर ले जाए।
स्वामीजी ने स्वामी विवेकानन्द के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु ईश्वर का सबसे उज्ज्वल मुखौटा है, जिसके माध्यम से वे मानव के समीप आते हैं। अन्ततः वही गुरु हमें परमात्मा तक पहुँचा देता है।
लखनऊ के सुप्रसिद्ध गायक राहुल अवस्थी एवं उनकी टीम ने भक्तिमय गीतों की मनोहारी प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर प्रख्यात कलाकार सुमित मलिक ने संगत की। इसके उपरान्त अशोक मुखर्जी(कानपुर) ने भक्तिगीत प्रस्तुत किए, जिनके साथ तबले पर शुभम राज (लखनऊ) ने संगत दी।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर दूरदर्शन लखनऊ के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘‘नमस्ते यूपी’’ में रामकृष्ण मठ, लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किये। अपने उद्बोधन में महाराज जी ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए गुरु को जीवात्मा और परमात्मा के मध्य सेतु बताया। उन्होंने कहा कि गुरु के मार्गदर्शन, कृपा एवं उपदेशों के माध्यम से ही मनुष्य अपने जीवन के परम लक्ष्य – ईश्वर की प्राप्ति-की ओर अग्रसर हो सकता है। साथ ही उन्होंने भगवान श्रीरामकृष्ण, श्री माँ सारदा देवी तथा स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान
विशेष धर्मसभा में ‘‘गुरु-तत्त्व एवं गुरु का महत्त्व’’ विषय पर व्याख्यान देते हुए स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज ने कहा कि मानव जीवन का परम उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति है तथा समर्थ गुरु के मार्गदर्शन के बिना यह लक्ष्य प्राप्त करना अत्यन्त कठिन है। उन्होंने कहा कि ‘‘गु’’ अज्ञान रूपी अंधकार का तथा ‘‘रु’ ज्ञान रूपी प्रकाश का द्योतक है। गुरु अपने ज्ञान के प्रकाश से शिष्य के अज्ञान का नाश कर उसे ईश्वर की ओर अग्रसर करते हैं।
सायंकालअशोक मुखर्जी द्वारा भक्तिगीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई, जिसमें तबले पर सुमित मलिक ने संगत की। संध्यारती के उपरान्त समूह में श्यामनाम संकीर्तन तथा स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज के नेतृत्व में सामूहिक श्री गुरु वन्दना सम्पन्न हुई। समापन भजन के पश्चात उपस्थित सभी श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया।



