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बुद्ध के जन्म का कारण मानव जीवन के दुःखों का समाधान  – स्वामी मुक्तिनाथानंद

अमित चावला /लखनऊ.

रामकृष्णवचनामृत पर अपने रविवारीय साप्ताहिक प्रवचन में रामकृष्ण मठ लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानंद  ने कहा कि भगवान के दस प्रमुख अवतारों में भगवान बुद्ध को नवम अवतार माना जाता है। हिन्दू धर्म के अनुसार जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और अज्ञान बढ़ता है, तब भगवान मानवता के कल्याण के लिए अवतार लेते हैं। बुद्ध अवतार का विशेष उद्देश्य लोगों को अहिंसा, दया, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलाना था। उस समय समाज में अंधविश्वास, कठोर यज्ञ-प्रथाएँ और हिंसा बढ़ रही थीं। बुद्ध ने इन सबका विरोध करते हुए सरल और व्यावहारिक धर्म का उपदेश दिया। उन्होंने बताया कि सच्चा धर्म बाहरी कर्मकांडों में नहीं, बल्कि मन की शुद्धता और अच्छे आचरण में है।

  स्वामी जी ने कहा कि बुद्ध के उपदेश अनेक ग्रंथों में विभिन्न भाषाओं में संरक्षित हैं। उनके प्रमुख ग्रंथों में त्रिपिटक का विशेष स्थान है। यह तीन भागों—विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक—में विभाजित है। इसमें बुद्ध के उपदेश, उनके अनुयायियों के लिए नियम और गूढ़ दार्शनिक विचार शामिल हैं। ये ग्रंथ मूलतः पाली भाषा में लिखे गए, लेकिन समय के साथ संस्कृत, तिब्बती, चीनी, जापानी और अन्य भाषाओं में भी अनुवादित हुए। इससे बुद्ध के विचार पूरे विश्व में फैल गए।
स्वामी जी ने आगे व्याख्या करते हुए बताया कि पुराणों के अनुसार भगवान बुद्ध (बुद्ध अवतार) का जन्म एक विशेष उद्देश्य से हुआ था, जो मुख्य रूप से धर्म की रक्षा और समाज को सही मार्ग दिखाने से जुड़ा है। पुराणों में बताया गया है कि जब संसार में अधर्म, हिंसा और अज्ञान बढ़ जाता है, तब भगवान विभिन्न अवतार लेकर संतुलन स्थापित करते हैं। बुद्ध अवतार का मुख्य उद्देश्य था लोगों को अहिंसा, करुणा और सत्य का मार्ग सिखाना। उस समय कुछ लोग वेदों और यज्ञों का गलत अर्थ निकालकर अत्यधिक पशु बलि और हिंसा करने लगे थे। ऐसे में भगवान ने बुद्ध रूप में जन्म लेकर इन कुरीतियों का विरोध किया और लोगों को समझाया कि सच्चा धर्म प्रेम, दया और आत्मसंयम में है। कुछ पुराणों के अनुसार, बुद्ध अवतार का एक और उद्देश्य था असुरों और दुष्ट प्रवृत्ति के लोगों को वेदमार्ग से हटाना, ताकि वे अपनी शक्ति खो दें और देवताओं का संतुलन बना रहे। इस दृष्टि से बुद्ध ने ऐसे उपदेश दिए जो उन्हें मोह में डाल दें, जिससे धर्म की रक्षा हो।

निष्कर्ष रूप में स्वामी मुक्तिनाथानंद ने बताया कि इस प्रकार बुद्ध अवतार मानवता के लिए एक महान प्रेरणा है। बुद्ध ने सिखाया कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि मन की शांति और आत्मज्ञान में है। उनके उपदेश आज भी विश्वभर में शांति, प्रेम और सद्भाव का संदेश देते हैं और मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं।

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