आस्था की धारा चंद्रकेशर नदी गंदगी और उपेक्षा की मार से जूझ रही नागरिकों ने सफाई और गहरीकरण की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
कांटाफोड़ – कांटाफोड़ नगर की जीवनरेखा कही जाने वाली चंद्रकेशर नदी की बिगड़ती स्थिति को लेकर मंगलवार को नागरिकों ने मुख्य नगर परिषद अधिकारी (सीएमओ) को ज्ञापन सौंपा। नागरिकों ने नदी की तत्काल साफ-सफाई, गहरीकरण और प्रदूषण रोकने की मांग की।
चंद्रकेशर नदी क्षेत्र की एक प्राचीन और धार्मिक आस्था से जुड़ी नदी मानी जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह नदी न सिर्फ पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों का केंद्र है, बल्कि नगर के भूजल स्तर और आसपास के जल स्रोतों को भी संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती है। कभी स्वच्छ बहाव और शांत किनारों के लिए पहचानी जाने वाली यह नदी आज उपेक्षा और अव्यवस्था के कारण अपनी प्राकृतिक सुंदरता खोती जा रही है।
वर्तमान में नदी में जगह-जगह जलकुंभी और कचरे का जमाव हो गया है। नालों से आने वाला गंदा पानी सीधे नदी में मिल रहा है, जिससे जल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। नदी किनारे स्थित घाटों और मंदिरों पर प्रतिदिन श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन बदबू और गंदगी के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
नागरिकों ने यह भी बताया कि पूर्व में निर्मित नालियां गाद से भर चुकी हैं, जिससे बरसाती और घरेलू गंदा पानी सीधे नदी में प्रवाहित हो रहा है। साथ ही बड़े पुल के समीप संचालित मांस एवं मछली बाजार से निकलने वाले अपशिष्ट को लेकर भी लोगों ने गंभीर आपत्ति जताई है।
सीएमओ ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
इस संबंध में मुख्य नगर परिषद अधिकारी ने बताया कि चंद्रकेशर नदी की सफाई को लेकर नगर परिषद गंभीर है। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन के भीतर प्राथमिक स्तर पर सफाई अभियान शुरू कराया जाएगा, जिसमें जलकुंभी और सतही गंदगी हटाई जाएगी। इसके साथ ही नालों के गंदे पानी की निकासी व्यवस्था की भी समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि नदी में प्रदूषण की समस्या को नियंत्रित किया जा सके।




