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डा. वी.के. वर्मा कृत ‘सिद्धार्थ से तथागत’ महाकाव्य का विमोचन

सिद्धार्थ के जीवन संघर्षो का नया द्वार खोलता है ‘सिद्धार्थ से तथागत’ महाकाव्य-डा. रेशमी पाण्डा मुखर्जी

 

बस्ती। वरिष्ठ साहित्यकार डा. वी.के. वर्मा कृत ‘सिद्धार्थ से तथागत’ महाकाव्य का विमोचन प्रेस क्लब सभागार में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि प्रोफेसर डा. रेशमी पाण्डा मुखर्जी कोलकाता ने कहा कि महात्मा बुद्ध का जीवन वृत्त अनूठा और कल्याणकारी है। डा. वी.के. वर्मा ने महाकाव्य की रचनाकर साहित्य क्षेत्र को अमूल्य निधि भेंट किया है। निश्चित रूप से यह महाकाव्य लोगों के हृदय परिवर्तन, प्रेम, अहिंसा, करूणा, महात्मा बुद्ध के अप्प दीपो भव के उपदेश को नयी गति देगा।

साहित्य भूषण हरीलाल मिलन ने कहा कि महात्मा बुद्ध रचनाकारों को स्वतः आकर्षित करते हैं। डा. वी.के. वर्मा कृत ‘सिद्धार्थ से तथागत’ महाकाव्य अनूठा और नये प्रतिमान स्थापित करेगा इसमें संदेह नहीं। डा. सोमेन्द्र पाण्डा कोलकाता ने महाकाव्य के अनेक प्रसंगों का उद्धरण देते हुये कहा कि कपिलवस्तु बस्ती मण्डल का अटूट हिस्सा है और डा. वी.के. वर्मा ने महाकाव्य परम्परा को पालन करते हुये तथागत के प्रति नवीन दृष्टिकोण दिया है। कार्यक्रम का संचालन करते हुये वरिष्ठ साहित्यकार डा. रामकृष्ण लाल जगमग ने कहा कि सिद्धार्थ से तथागत की यात्रा में अनेक मोड है किन्तु यशोधरा का चरित्र और मानसिक उत्सर्ग ऐतिहासिक है। यह महाकाव्य पाठकों को नवीन वैचारिकी से परिचित करायेगा। प्रदीप चन्द्र पाण्डेय, प्रेस क्लब अध्यक्ष विनोद उपाध्याय, डा. सत्यव्रत ने ‘सिद्धार्थ से तथागत’ महाकाव्य के विविध पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये डॉ. त्रिभुवन प्रसाद मिश्र ने कहा कि ‘सिद्धार्थ से तथागत’ महाकाव्य मील का पत्थर साबित होगा।

‘सिद्धार्थ से तथागत’ महाकाव्य के रचयिता डा. वी.के. वर्मा ने महाकाव्य के मुख्य अंशों को प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। विशेषकर यशोधरा प्रसंग ने वातावरण को सोचने पर बाध्य किया।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में आयोजित कवि सम्मेलन में डा. ओ.पी. वर्मा ‘ओम’, डा. वेद प्रकाश मणि, डा. प्रतिभा गुप्ता, अर्चना श्रीवास्तव, सागर गोरखपुरी, दीपक सिंह ‘प्रेमी’, डा. अफजल हुसेन अफजल, मकसूद अहमद, अनवार पारसा, सुशील सिंह पथिक आदि ने रचनाओं के माध्यम से सार्थक प्रस्तुतियां दी। डा. वी.के. वर्मा, डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ को श्याम निर्मम फाउन्डेशन गाजियाबाद द्वारा सम्मानित किया गया। डा. रेशमी पाण्डा मुखर्जी और हरीलाल मिलन को डा. वी.के. वर्मा द्वारा अपने माता-पिता की स्मृति में ग्यारह-ग्यारह हजार रूपये देकर सम्मानित किया गया। इसी क्रम में साहित्यिक संस्था शब्द सुमन द्वारा कबीर मठ के महन्थ विवेक ब्रम्हचारी, उमाशंकर दास, भन्ते संघ सागर, भिक्षणी धम्म मिश्र, भिक्षु धम्म पाल, डा. त्रिभुवन प्रसाद मिश्र, डा. आलोक रंजन वर्मा, विनोद उपाध्याय, डा. सौमेन्द्र पाण्डा, ओ.पी. वर्मा ओम, डा. वेद प्रकाश मणि, डा. प्रतिभा गुप्ता, मकसूद अहमद, डा. अफजल हुसेन अफजल, अनवार पारसा, हरीश दरवेश आदि को अंग वस्त्र, सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे। आभार ज्ञापन डा. आलोक रंजन वर्मा ने किया।

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