*भीषण गर्मी में दीनदयाल नगर की जनता बेहाल: सुबह से दोपहर तक बिजली गुल, वोल्टेज की समस्या से त्रस्त लोग, कर्मचारी फोन नहीं उठाते, पार्षद पर भी उठे सवाल*
जिला ब्यूरो चीफ अभिषेक दुबे
*राजनांदगांव।* संस्कारधानी के दीनदयाल नगर में बिजली विभाग की लापरवाही से आम जनता का बुरा हाल है। भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान के बीच शुक्रवार को सुबह से दोपहर तक पूरे क्षेत्र की बिजली बंद रही। साथ ही वोल्टेज की समस्या ने लोगों को और ज्यादा परेशान कर दिया।
*सुबह से दोपहर तक अंधेरा:*
स्थानीय निवासियों का कहना है कि आज सुबह से ही दीनदयाल नगर में बिजली आपूर्ति ठप रही। दोपहर तक लाइन चालू नहीं हुई। जिन घरों में इन्वर्टर हैं, वे भी जवाब दे गए। पंखे, कूलर बंद होने से बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग गर्मी में बेहाल हो गए। जब बिजली आई भी तो वोल्टेज इतना कम था कि उपकरण चल नहीं पा रहे थे।
*पहले क्यों नहीं हुआ समाधान:*
नागरिकों का आरोप है कि वोल्टेज की समस्या नई नहीं है। गर्मी शुरू होने से पहले ही विभाग को इसका निराकरण कर लेना चाहिए था। अब विभाग कह रहा है कि क्षेत्र में नए ट्रांसफार्मर की जरूरत है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब समस्या पहले से थी तो ट्रांसफार्मर पहले क्यों नहीं लगाया गया। भीषण गर्मी में लोगों को परेशानी में डालना कहां तक सही है।
*फोन नहीं उठाते कर्मचारी:*
बिजली गुल होने पर जब लोग शिकायत दर्ज कराने के लिए बिजली दफ्तर फोन करते हैं तो या तो लाइन व्यस्त बताती है या कोई फोन अटेंड नहीं करता। घंटों प्रयास के बाद भी संपर्क नहीं हो पाता। आम जनता परेशान है कि आखिर अपनी समस्या लेकर जाए तो किसके पास जाए।
*पार्षद पर भी नाराजगी:*
स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों पर भी नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय वोट मांगने के लिए नेता और पार्षद घर-घर आते थे, लेकिन अब दीनदयाल नगर की स्थिति देखने के लिए पार्षद महोदय के पास समय नहीं है। जनता का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो भविष्य में वोट की उम्मीद न रखें।
*प्रशासन से मांग:*
दीनदयाल नगर के रहवासियों ने बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल क्षेत्र में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाया जाए और वोल्टेज की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। साथ ही शिकायत सुनने के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए ताकि जनता को बार-बार परेशान न होना पड़े।
लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, क्योंकि भीषण गर्मी में बिना बिजली के रहना मुश्किल हो गया है।
