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महासमुंद जिले में खाद का पर्याप्त भंडारण, किसानों को समय पर उपलब्ध कराई जा रही उर्वरक*

महासमुंद जिले में खाद का पर्याप्त भंडारण, किसानों को समय पर उपलब्ध कराई जा रही उर्वरक*

*महासमुंद जिले में खाद का पर्याप्त भंडारण, किसानों को समय पर उपलब्ध कराई जा रही उर्वरक*

तिलक राम पटेल महासमुंद ब्यूरोचिफ भारत संवाद टीवी न्यूज चैनल दैनिक अपडेट पेपर

महासमुंद,खरीफ सीजन को देखते हुए महासमुंद जिले में किसानों के लिए खाद एवं उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है। कृषि विभाग द्वारा जिले की सभी सहकारी समितियों एवं विक्रय केंद्रों में खाद उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि किसानों को समय पर खेती कार्य के लिए आवश्यक उर्वरक मिल सके।
उपसंचालक कृषि श्री एफ.आर. कश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में वर्तमान में यूरिया 16,409 मीट्रिक टन, सुपर फास्फेट 8,881 मीट्रिक टन, पोटाश 2,207 मीट्रिक टन तथा डीएपी 6,476 मीट्रिक टन भंडारण किया गया है। वहीं अब तक किसानों को यूरिया 6,908 मीट्रिक टन, सुपर फास्फेट 2,939 मीट्रिक टन, पोटाश 343 मीट्रिक टन तथा डीएपी 1,823 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि जिले में खाद की कमी नहीं है तथा आवश्यकतानुसार भंडारण किया गया है।किसानों की आवश्यकता के अनुसार निरंतर खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा सभी विकासखंडों में खाद भंडारण एवं वितरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।
कलेक्टर विनय लंगेह ने सभी सहकारी समितियों एवं खाद विक्रेताओं को पीओएस मशीन के माध्यम से पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि किसानों को शासन द्वारा निर्धारित मात्रा एवं दर पर ही खाद उपलब्ध कराया जाए। साथ ही किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राज्य शासन एवं कृषि विभाग द्वारा किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को पारंपरिक यूरिया के साथ-साथ नैनो यूरिया के उपयोग के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नैनो यूरिया के प्रयोग से कम मात्रा में अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त होते हैं, जिससे खेती की लागत कम होती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता भी सुरक्षित रहती है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे आवश्यकता अनुसार ही खाद का उठाव करें तथा अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें। डीएपी एवं यूरिया के अत्यधिक उपयोग न करते हुए जैविक खाद, सुपर फास्फेट, पोटाश एवं नैनो यूरिया का संतुलित उपयोग करें, ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहे और उत्पादन में वृद्धि हो सके।
विभाग द्वारा किसानों को यह भी सलाह दी जा रही है कि वे केवल अधिकृत सहकारी समितियों एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही खाद खरीदें तथा पीओएस मशीन से रसीद अवश्य प्राप्त करें।
जिले में किसान खरीफ सीजन के लिए खाद का उठाव भी शुरू कर चुके हैं।
ग्राम मोंगरा के किसान रामलाल साहू ने आज झालखम्हरिया सोसायटी से खाद प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि उन्हें नियमानुसार समय पर खाद उपलब्ध हो गया और किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। किसान अब खेती की तैयारियों में जुट गए हैं तथा समय पर खाद मिलने से वे संतुष्ट है।

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