धन्वंतरि नगर क्षेत्र: करोड़ों की सड़कें, लेकिन स्ट्रीट लाइटें बंद — हादसे और अपराध का बढ़ा खतरा
जबलपुर। शहर के पॉश और तेजी से विकसित हो रहे धन्वंतरि नगर क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की बदहाली अब लोगों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। कुछ समय पहले धन्वंतरि नगर से गढ़ा पुरवा रोड तक नाली और पेवर ब्लॉक निर्माण की समस्या सामने आई थी, जिसका काम आज भी बेहद धीमी गति से चल रहा है। अब क्षेत्र के व्यापारी और रहवासी एक और बड़ी समस्या को लेकर आक्रोशित हैं — बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटें लगाई तो गईं, लेकिन शुरुआत में एक-दो दिन जलने के बाद आज तक दोबारा चालू नहीं हुईं। नतीजा यह है कि पूरी सड़क शाम होते ही अंधेरे में डूब जाती है। गढ़ा पुरवा रोड, साईं कॉलोनी रोड और बायपास रोड पर रात के समय हालात इतने खराब हो जाते हैं कि राहगीरों और वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है।
व्यापारियों का आरोप है कि अंधेरे के कारण आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। कई बार वाहन चालक गड्ढों और अधूरे निर्माण कार्यों के कारण गिरकर घायल हो चुके हैं। वहीं रहवासियों का कहना है कि अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व सक्रिय हो रहे हैं। क्षेत्र में चोरी, लूट और अन्य आपराधिक घटनाओं का डर लगातार बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा या गंभीर आपराधिक वारदात हो सकती है।
हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र में समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन खुलकर सामने आकर बोलने को कोई तैयार नहीं है। रहवासी और व्यापारी कैमरे के सामने आने से बच रहे हैं। आखिर ऐसा कौन सा डर है जो लोगों की आवाज दबा रहा है? लोग किससे डर रहे हैं? क्या क्षेत्र में जिम्मेदार विभागों का इतना भय है कि जनता अपनी ही समस्याएं खुलकर नहीं बता पा रही? यह सवाल अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम, बिजली विभाग और प्रशासन आखिर किस बात का इंतजार कर रहे हैं? करोड़ों रुपये खर्च कर विकास कार्यों के दावे करने वाले जिम्मेदार विभाग क्या केवल उद्घाटन तक ही सीमित हैं? जनता पूछ रही है कि जब स्ट्रीट लाइटें जलानी ही नहीं थीं तो उन्हें लगाया क्यों गया?
क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्ट्रीट लाइट व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई और अधूरे कार्य पूरे नहीं हुए, तो वे नगर निगम और प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।



