केशकाल बायपास में बड़ी लापरवाही या मिलीभगत
8 हजार से ज्यादा पेड़ कट गए और वन विभाग देखता रहा ?

8 हजार से ज्यादा पेड़ कट गए और वन विभाग देखता रहा ?
केशकाल बायपास में बड़ी लापरवाही या मिलीभगत !
केशकाल/कोंडागांव।
एनएच-30 केशकाल बायपास परियोजना अब भ्रष्टाचार, लापरवाही और पर्यावरण विनाश को लेकर बड़े विवाद में घिरती नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार स्वीकृत डीजीपीएस एलाइनमेंट को दरकिनार कर गलत जगह पर 8159 पेड़ों की कटाई कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि वन विभाग के अधिकारी लगातार निरीक्षण करते रहे, लेकिन हजारों पेड़ कटते रहे और किसी ने रोकने की कोशिश तक नहीं की।
अब जब मामला सामने आया तो पता चला कि असली स्वीकृत एलाइनमेंट पर सड़क बनाने के लिए फिर से 6336 पेड़ों की कटाई करनी पड़ेगी। यानी पहले भी हजारों पेड़ कटे और अब दोबारा हजारों पेड़ों पर संकट मंडरा रहा है। इससे साफ सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी गलती हुई कैसे ? और अगर गलती थी तो जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की ?
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि क्या वन विभाग सिर्फ कागजों में निरीक्षण करता रहा ? क्या अधिकारियों को पेड़ों की कटाई दिखाई नहीं दी ? या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया गया ?
हजारों पेड़ों की कटाई से केशकाल घाटी का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। पशु-पक्षियों का प्राकृतिक आश्रय खत्म हो रहा है और आने वाले समय में इसका असर पूरे क्षेत्र के मौसम और प्राकृतिक संतुलन पर पड़ सकता है।
जानकारी के अनुसार यह परियोजना वर्ष 2018 तक पूरी होनी थी, लेकिन 2026 तक भी अधूरी पड़ी है। दूसरी ओर परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 307 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुकी है। अब गलत कटाई और तकनीकी गड़बड़ी के कारण 20 से 25 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होने की संभावना जताई जा रही है।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस पूरे मामले का जिम्मेदार कौन है ? क्या केवल जांच की बात कहकर मामले को दबा दिया जाएगा या फिर वास्तव में दोषी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर कार्रवाई होगी ?