यह रहा राजनांदगांव में आवारा मवेशियों की समस्या !
राजनांदगांव: सड़कों पर ‘लावारिस’ सिस्टम, मवेशियों के जमावड़े से राहगीर पस्त
राजनांदगांव। शहर की सड़कों पर आवारा मवेशियों का कब्जा अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुका है। नगर निगम के तमाम दावों और ‘रोका-छेका’ जैसे अभियानों के बावजूद, शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर बैठे मवेशी न केवल यातायात को बाधित कर रहे हैं, बल्कि गंभीर हादसों को खुला निमंत्रण दे रहे हैं।
इन इलाकों में स्थिति सबसे बदतर
शहर का शायद ही कोई ऐसा कोना बचा हो जहां मवेशियों का डेरा न हो। विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक है:
दिग्विजय कॉलेज रोड: छात्रों की भारी आवाजाही वाले इस मार्ग पर मवेशियों के झुंड के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है।
जय स्तंभ चौक: शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले इस चौक पर मवेशियों के बीच सड़क पर बैठने से दोपहिया और चार पहिया वाहनों का निकलना दूभर हो गया है।
मानव मंदिर चौक: व्यापारिक केंद्र होने के कारण यहाँ भीड़ अधिक रहती है, और मवेशियों की मौजूदगी से पैदल चलने वालों को भी जान का जोखिम बना रहता है।
हादसों का हॉटस्पॉट बनी सड़कें
सड़क के बीचों-बीच बैठे ये मवेशी रात के अंधेरे में वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मवेशी आपस में लड़ते हुए कई बार दुकानों के भीतर घुस जाते हैं या राहगीरों को चपेट में ले लेते हैं।
“नगर निगम की टीम कभी-कभार कार्रवाई तो करती है, लेकिन कुछ ही घंटों बाद स्थिति वैसी ही हो जाती है। प्रशासन को मवेशी मालिकों पर सख्त जुर्माना लगाना चाहिए।” — एक स्थानीय नागरिक
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि शहर के सबसे व्यस्ततम और वीआईपी रास्तों पर यह हाल है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। कांजी हाउस की व्यवस्था और गौठानों की उपयोगिता पर अब सवाल उठने लगे हैं। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
निष्कर्ष: राजनांदगांव की जनता अब इस समस्या से स्थाई निजात चाहती है। यदि समय रहते आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर नहीं भेजा गया, तो आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन तेज हो सकता है।
