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आंगनबाड़ी केंद्र की कथित गंभीर अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, कार्यकर्ता एवं सहायिका को पद से पृथक करने की मांग*

आंगनबाड़ी केंद्र की कथित गंभीर अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, कार्यकर्ता एवं सहायिका को पद से पृथक करने की मांग*

*आंगनबाड़ी केंद्र की कथित गंभीर अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, कार्यकर्ता एवं सहायिका को पद से पृथक करने की मांग*

 

तिलक राम पटेल महासमुंद ब्यूरोचिफ भारत संवाद टीवी न्यूज चैनल दैनिक अपडेट पेपर

जनदर्शन में गूंजा आंवलाचक्का आंगनबाड़ी का मामला, निष्पक्ष जांच और कठोर कार्यवाही की मांग

महासमुंद/सरायपाली। विकासखंड सरायपाली अंतर्गत ग्राम आंवलाचक्का के ग्रामीणों ने ग्राम स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक–02 (बी) में व्याप्त कथित गंभीर अनियमितताओं, शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लगातार लापरवाही, पात्र हितग्राहियों की उपेक्षा तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न किए जाने के आरोपों को लेकर जिला कलेक्टर महासमुंद के जनदर्शन कार्यक्रम में विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है। ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती लकेश्वरी ताण्डी एवं सहायिका श्रीमती डिग्रीमोती उरांव को पद से पृथक करते हुए उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत शिकायत के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक–02 (बी) में लंबे समय से समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों एवं सेवाओं का समुचित संचालन नहीं हो रहा है। इसका प्रतिकूल प्रभाव सीधे तौर पर बच्चों, किशोरी बालिकाओं, गर्भवती महिलाओं एवं शिशुवती माताओं पर पड़ रहा है, जो शासन की महत्वपूर्ण पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं के वास्तविक लाभार्थी हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग की किशोरी बालिकाओं का नियमित पंजीयन नहीं किया जा रहा है तथा उन्हें निर्धारित पूरक पोषण आहार से भी वंचित रखा जा रहा है। इसी प्रकार अनेक गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं का समय पर पंजीयन नहीं होने के कारण वे शासन द्वारा संचालित विभिन्न पोषण एवं स्वास्थ्य योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्र नहीं बुलाया जाता, जिससे उनकी प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण एवं पोषण संबंधी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। आरोप है कि केंद्र का संचालन भी नियमित रूप से नहीं किया जाता तथा कई अवसरों पर केंद्र बंद रहने के कारण हितग्राहियों को निराश होकर लौटना पड़ता है।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि बच्चों के वजन मापन एवं वृद्धि निगरानी कार्यक्रम का नियमित संचालन नहीं किया जा रहा है। इसके कारण कुपोषण अथवा अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान एवं उपचार की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसके अतिरिक्त गोद भराई, अन्नप्राशन एवं मातृ-शिशु कल्याण से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का भी नियमित आयोजन नहीं किए जाने की शिकायत की गई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शासन द्वारा निर्धारित पोषण मानकों एवं मेन्यू के अनुरूप बच्चों को गरम एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के बजाय कई अवसरों पर केवल बिस्किट वितरित किए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह स्थिति सही है तो यह बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य हितों की गंभीर उपेक्षा को दर्शाता है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई पात्र हितग्राहियों को कथित रूप से पंजीयन से वंचित रखा गया, जिसके कारण वे पोषण आहार एवं अन्य शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित हो गए। हितग्राहियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार तथा योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही के अभाव की शिकायत भी ग्रामीणों ने की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि योजनाओं की जानकारी लेने, सुझाव देने अथवा शिकायत करने पर आंगनबाड़ी सहायिका एवं उनके परिजनों द्वारा अभद्र व्यवहार, विवाद एवं दबावपूर्ण रवैया अपनाया जाता है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष और भय का वातावरण निर्मित हो रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार उक्त विषय को लेकर पूर्व में भी महिला एवं बाल विकास विभाग सहित संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार मौखिक एवं लिखित शिकायतें की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त समाचार माध्यमों के माध्यम से भी मामला उठाया गया, किंतु अब तक कोई प्रभावी एवं स्थायी कार्रवाई नहीं होने के कारण स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद यदि केवल औपचारिक चेतावनी देकर मामलों को समाप्त किया जाता रहा, तो इससे जवाबदेही की भावना कमजोर होती है और योजनाओं के संचालन में कथित लापरवाही लगातार बनी रहती है। इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव उन बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं एवं शिशुवती माताओं पर पड़ता है, जिनके कल्याण के उद्देश्य से ये योजनाएं संचालित की जाती हैं।

जनदर्शन में प्रस्तुत आवेदन के माध्यम से ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उचित, निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराते हुए आंगनबाड़ी केंद्र में व्याप्त कथित अनियमितताओं, लापरवाही एवं हितग्राहियों के अधिकारों की उपेक्षा के मामले में कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं एवं शिशुवती माताओं के हितों से जुड़े इस गंभीर विषय को देखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती लकेश्वरी ताण्डी एवं सहायिका श्रीमती डिग्रीमोती उरांव को तत्काल पद से पृथक किया जाए तथा उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही, यदि प्रकरण में किसी स्तर पर विभागीय उदासीनता, संरक्षण अथवा जवाबदेही का अभाव पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी कठोर प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शिता, विश्वसनीयता एवं प्रभावशीलता बनी रहे तथा वास्तविक पात्र हितग्राहियों को उनका अधिकार प्राप्त हो सके।

उक्त शिकायत एवं जनहित की मांग को लेकर ग्राम के सुरोतीलाल लकड़ा, हेमकुमार यादव, माधवदास मानिकपुरी, देवकुमार लकड़ा सहित अन्य ग्रामीण जनदर्शन में उपस्थित हुए तथा प्रशासन से शीघ्र, निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं एवं शिशुवती माताओं के अधिकारों, स्वास्थ्य, पोषण और भविष्य से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। उन्होंने जिला प्रशासन से अपेक्षा व्यक्त की है कि जनहित, बाल हित एवं मातृ हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मामले की गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र हितग्राहियों तक पारदर्शी, जवाबदेह एवं प्रभावी ढंग से पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा!

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