*मानसून की पहली दस्तक से उधड़ी सड़कों की परत, जानलेवा बने गड्ढे:
प्रशासनिक दावों की खुली पोल रेवाडीह / राजनंदगांव:*
*संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव*

*मानसून की पहली दस्तक से उधड़ी सड़कों की परत, जानलेवा बने गड्ढे: प्रशासनिक दावों की खुली पोल रेवाडीह / राजनंदगांव:*
मानसून की शुरुआत ने जहाँ एक तरफ भीषण गर्मी और उमस से राहत पहुँचाई है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक तैयारियों की कलई भी खोलकर रख दी है। हर साल की तरह इस बार भी बरसात की पहली कुछ बौछारों के साथ ही शहर और आसपास के इलाकों की सड़कें बुरी तरह खस्ताहाल हो चुकी हैं। रेवाड़ी के प्रमुख मार्गों से लेकर राजनंदगांव से सटे सीमावर्ती और संभावित क्षेत्रों तक, सड़कों पर बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढे उभर आए हैं।
हालात ऐसे हैं कि राहगीरों को यह समझ पाना मुश्किल हो रहा है कि “सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क।”
हादसों को न्योता देते गहरे गड्ढे
बरसात के पानी से लबालब भरे ये गड्ढे अब केवल आवाजाही में रुकावट नहीं, बल्कि सीधे तौर पर हादसों को न्योता दे रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक सबसे ज़्यादा जोखिम में हैं; पानी भरे गड्ढों का सही अंदाजा न होने के कारण आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। व्यस्त चौराहों और मुख्य कनेक्टिंग रोड्स पर गाड़ियों की रफ्तार थम सी गई है, जिससे घंटों ट्रैफ़िक जाम की स्थिति बनी रहती है।
हर साल का ड्रामा: घटिया निर्माण और कागज़ी मेंटेनेंस?
स्थानीय निवासियों और दुकानदारों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि बरसात से ठीक पहले पीडब्ल्यूडी (PWD) और नगर निगम द्वारा मेंटेनेंस व पैचवर्क के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में डामर की परतें बह जाती हैं।
रेवाडीह में श्रीमती पूर्णिमा साहू राजगामी संपदा की अध्यक्ष का निवास है, एल्डरमैन सूर्यकांत श्रीवास का निवास है, पार्षद बीना ध्रुव का निवास है, तीनों ही बीजेपी से हैं लेकिन कोई कुछ नहीं करता।
“हर साल बारिश शुरू होते ही सड़कों का यही हाल हो जाता है। लाख शिकायतों के बावजूद सिर्फ नाममात्र का पैचवर्क कर दिया जाता है, जो पहली बारिश भी नहीं झेल पाता। टैक्स देने के बाद भी जनता को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।”
— स्थानीय नागरिक
स्कूल जाने वाले बच्चे और एम्बुलेंस सबसे ज़्यादा प्रभावित
सड़कों की इस बदहाली का सबसे बुरा असर सुबह स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों, दफ़्तर जाने वाले लोगों और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा है। राजनंदगांव से लगे सीमावर्ती इलाकों और रेवाडीह के बाहरी रास्तों पर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण रात के समय स्थिति और भी ख़तरनाक हो जाती है।
प्रशासन की चुप्पी और जनता की माँग
बार-बार उठते सवालों के बीच संबंधित विभाग के अधिकारी इसे “अत्यधिक बारिश और भारी वाहनों की आवाजाही” का नतीजा बताकर पल्ला झाड़ते नज़र आते हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार करता है या समय रहते इन जानलेवा गड्ढों को भरने और सड़कों की गुणवत्ता सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है।


