*बड़ा झटका: सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए इक्विटी नियमों पर लगाई रोक
केंद्र सरकार से मांगा जवाब

*बड़ा झटका: सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए इक्विटी नियमों पर लगाई रोक, केंद्र सरकार से मांगा जवाब
नई दिल्ली:*
*संवाददाता संगीता सिंह राजनांदगांव*
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अधिसूचित ‘इक्विटी नियम 2026’ (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अंतरिम रोक लगा दी है। सर्वोच्च अदालत ने इन नए दिशा-निर्देशों को प्रथम दृष्टया (prima facie) अस्पष्ट और दुरुपयोग के योग्य मानते हुए केंद्र सरकार तथा यूजीसी को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत की सख्त टिप्पणियां
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने नियमों की समीक्षा करते हुए गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जिस भाषा और प्रारूप में नियम तैयार किए गए हैं, वे सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देने के बजाय परिसरों में विभाजन की स्थिति पैदा कर सकते हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत की प्रमुख बातें:
दुरुपयोग की संभावना: पीठ ने टिप्पणी की कि भेदभाव की परिभाषा में अस्पष्टता (Vagueness) है, जिससे इसका दुरुपयोग होने का जोखिम बढ़ जाता है।
सामाजिक सद्भाव पर असर: मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें ऐसा ढांचा तैयार करना चाहिए जिससे समाज एकजुट हो, न कि ऐसा जिससे परिसरों में अलगाव या दूरी बढ़े।
विशेषज्ञ समिति का सुझाव: कोर्ट ने केंद्र सरकार को वरिष्ठ न्यायविदों और सामाजिक विशेषज्ञों की एक समिति बनाकर इन नियमों पर फिर से विचार करने की सलाह दी।
विवाद का मुख्य कारण
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि यूजीसी के नए नियमों में भेदभाव (Discrimination) की परिभाषा को एकतरफा रखा गया था, जिसमें सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों के लिए संरक्षण का अभाव था और झूठी शिकायतों से बचाव के लिए कोई स्पष्ट तंत्र मौजूद नहीं था।
2012 के नियम रहेंगे प्रभावी
शीर्ष अदालत ने अपने विशेषाधिकार (अनुच्छेद 142) का प्रयोग करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक 2026 के नए नियमों पर अंतिम फैसला या संशोधन नहीं होता, तब तक 2012 के पुराने यूजीसी इक्विटी नियम ही लागू रहेंगे।
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने भी अदालत को अवगत कराया है कि केंद्र सरकार और यूजीसी इन नियमों की समीक्षा कर रहे हैं और जल्द ही अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगे।
