पोटाकेबिन की गर्मी से बेहाल 66 बच्चे, पेड़ की छांव में लग रही प्राथमिक शाला की कक्षाएं!!
चार साल पंचायत भवन में चली पढ़ाई, अब पक्के स्कूल भवन का इंतजार; भीषण गर्मी में बच्चों को हो रही परेशानी

पोटाकेबिन की गर्मी से बेहाल 66 बच्चे, पेड़ की छांव में लग रही प्राथमिक शाला की कक्षाएं!!
सुमित (जिला संवाददाता, कांकेर)
चार साल पंचायत भवन में चली पढ़ाई, अब पक्के स्कूल भवन का इंतजार; भीषण गर्मी में बच्चों को हो रही परेशानी
पखांजुर। पक्के स्कूल भवन के अभाव में पखांजुर क्षेत्र के ग्राम उलिया स्थित प्राथमिक शाला के 66 बच्चे इन दिनों पेड़ की छांव में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पहली से पांचवीं तक संचालित इस विद्यालय में दो शिक्षक पदस्थ हैं। स्कूल के पास स्वयं का पक्का भवन नहीं होने के कारण लंबे समय से बच्चों को वैकल्पिक व्यवस्था में पढ़ाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, करीब चार वर्षों तक प्राथमिक शाला का संचालन पंचायत भवन में किया गया। पंचायत के नियमित कामकाज में हो रही परेशानी के चलते बाद में बच्चों के लिए पोटाकेबिन की व्यवस्था की गई। हालांकि गर्मी के दिनों में पोटाकेबिन के अंदर तापमान काफी बढ़ जाने से वहां बैठकर पढ़ाई करना बच्चों के लिए मुश्किल हो रहा है।
पोटाकेबिन के अंदर गर्मी, बाहर पेड़ की छांव बनी सहारा
भीषण गर्मी के बीच पोटाकेबिन के अंदर बच्चों के लिए बैठना परेशानी का कारण बन रहा है। ऐसे में शिक्षक मजबूरी में विद्यालय की कक्षाएं पेड़ की छांव के नीचे लगा रहे हैं। खुले वातावरण में पढ़ाई के दौरान बच्चों को गर्मी के साथ-साथ मौसम में होने वाले बदलाव की भी चिंता बनी रहती है।
अभिभावकों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय है। उनका कहना है कि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए स्कूल भवन का निर्माण जल्द किया जाना चाहिए।
कई बार अधिकारियों को कराया गया अवगत
विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों के अनुसार, स्कूल भवन की आवश्यकता को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। लंबे समय से भवन की मांग की जा रही है। अब शिक्षा विभाग की ओर से भवन स्वीकृत होने की जानकारी दी जा रही है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराने की बात कही जा रही है।
पक्की छत का इंतजार कब होगा खत्म?
स्कूल भवन की स्वीकृति की जानकारी सामने आने के बाद अब ग्रामीणों और अभिभावकों को निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार है। फिलहाल पक्की छत के अभाव में 66 बच्चों की पढ़ाई कभी पोटाकेबिन तो कभी पेड़ की छांव में हो रही है। ऐसे में सवाल यह है कि जब तक नया भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक बच्चों को गर्मी और मौसम की परेशानियों से सुरक्षित रखते हुए नियमित पढ़ाई की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

