भगवान महावीर की जयंती पर रामकृष्ण मठ में सत्संग और हनुमान चालीसा का आयोजन
अमित चावला/ लखनऊ.

- लखनऊ.महावीर जयंती के अवसर पर रामकृष्ण मठ, लखनऊ के अध्यक्ष, स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने जैन सिद्धांतो में विश्वास रखने वाले शांतिप्रिय-सहृदय जैन समाज और सम्पूर्ण विश्व को महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ दी।
मंगलवार को रामकृष्ण मठ, निराला नगर, लखनऊ में तीर्थंकर भगवान महावीर जी की जयंती भव्य रूप से मनाई गई.शंखनाद व मंगल आरती के बाद वैदिक मंत्रोच्चारण, भागवत गीता का पाठ रामकृष्ण मठ, लखनऊ के स्वामी इष्टकृपानन्द के नेतृत्व में हुआ।
सायंकाल मुख्य मंदिर में संध्यारति के पश्चात प्रमदादास मित्रा द्वारा रचित ‘श्रीरामकृष्ण शतकम्’ का पाठ व हनुमान चालीसा का पाठ स्वामी इष्टकृपानन्द के नेतृत्व में किया गया।
महावीर जयंती के अवसर पर रामकृष्ण मठ, लखनऊ के अध्यक्ष, स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने जैन सिद्धांतो में विश्वास रखने वाले समस्त शांतिप्रिय-सहृदय जैन समाज और सम्पूर्ण विश्व को महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ दी।
स्वामी जी ने ‘चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर का महान जीवन और जैन धर्म का सार विषय पर प्रवचन देते हुये बताया कि हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महावीर जयंती मनाई जाती है।
स्वामी जी ने प्रवचन देते हुए कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने बताया था कि जैन नैतिक सिद्धांतों ने भारतीय समाज को और अधिक पतन से कैसे बचाया। भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह पर सबसे अधिक जोर दिया। त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था। भगवान महावीर ने श्रमण और श्रमणी, श्रावक और श्राविका, सबको लेकर चतुर्विध संघ की स्थापना की। उन्होंने कहा-जो जिस अधिकार का हो, वह उसी वर्ग में आकर सम्यक्त्व पाने के लिए आगे बढ़े। जीवन का लक्ष्य है समता पाना। धीरे-धीरे संघ उन्नति करने लगा। देश के भिन्न-भिन्न भागों में घूमकर भगवान महावीर ने अपना पवित्र संदेश फैलाया।
प्रवचन के उपरान्त उपस्थित सभी भक्तों को प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।



