रामकृष्ण मठ ,लखनऊ में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ज्येष्ठ माह का तृतीय बड़ा मंगल
अमित चावला/ लखनऊ.

बड़ा मंगल लखनऊ की भक्ति, सेवा और सद्भाव की जीवंत परम्परा – स्वामी मुक्तिनाथानन्द
रामकृष्ण मठ, निराला नगर, लखनऊ में तृतीय बड़ा मंगल बहुत ही उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ रामकृष्ण मन्दिर में मनाया गया .
कार्यक्रम की शुरूआत प्रातः श्री श्री ठाकुर की मंगल आरती से हुई। तत्पश्चात प्रातः वैदिक मंन्त्रोच्चारण रामकृष्ण मठ के स्वामी इष्टकृपानन्द द्वारा किया गया।
तत्पश्चात मुख्य मंदिर के सामने श्री हनुमानजी की प्रतिष्ठित मूर्ति पर मालयार्पण, पूजा और आरती के बाद स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया गया और उपस्थित भक्तगणों के मध्य प्रसाद वितरण किया गया तथा स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज द्वारा सत प्रसंग हुआ।
सायं लखनऊ की 10 वर्षीय विलक्षण प्रतिभाशाली बालिका कुमारी आर्यमा शुक्ला ने श्री हनुमान सहस्त्रनाम का पाँच बार अखंड एवं प्रभावपूर्ण पाठ पूर्णतः स्मरण शक्ति के आधार पर प्रस्तुत किया। कुमारी आर्यमा को संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता, श्री दुर्गा सप्तशती सहित अनेक स्तोत्र, सहस्त्रनाम तथा लगभग तीन हजार संस्कृत श्लोक कंठस्थ हैं। उनकी अद्भुत स्मरण क्षमता, स्पष्ट उच्चारण एवं आध्यात्मिक अभिरुचि ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध एवं भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के समापन पर मठाध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने कुमारी आर्यमा शुक्ला को आशीर्वाद एवं सम्मान प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।
सायंकाल में भगवान श्री रामकृष्ण की सध्या आरती के पश्चात श्री हनुमानजी की पूजा एवं आरती रामकृष्ण मठ, लखनऊ के स्वामी कृष्णपदानन्द द्वारा की गई। तदुपरान्त स्वामी इष्टकृपानन्द जी के नेतृत्व में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।
‘बड़ा मंगल – लखनऊ की अद्वितीय सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत’विषय पर प्रवचन देते हुए रामकृष्ण मठ, लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी ने कहा कि बड़ा मंगल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि लखनऊ की आत्मा में रची-बसी भक्ति, सेवा और सद्भाव की दिव्य परम्परा है। ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को सम्पूर्ण लखनऊ जिस श्रद्धा, उत्साह और सेवा-भाव से हनुमान जी की आराधना में निमग्न हो जाता है, वह इस नगर की गंगा-जमुनी संस्कृति का अनुपम उदाहरण है।
स्वामी जी ने कहा कि हनुमान जी शक्ति, भक्ति, विनम्रता और पूर्ण समर्पण के अद्वितीय प्रतीक हैं। उनके जीवन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची शक्ति अहंकार में नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति समर्पण और मानवता की निस्वार्थ सेवा में निहित है। बड़ा मंगल का पर्व हमें केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रखता, बल्कि समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व का भी स्मरण कराता है। जगह-जगह लगने वाले भंडारे, जलसेवा और जनसेवा के विविध कार्य भारतीय संस्कृति की “नर सेवा ही नारायण सेवा” की भावना को जीवंत करते हैं।
स्वामी जी ने आगे कहा कि लखनऊ में बड़ा मंगल का उत्सव हिन्दू-मुस्लिम एकता, सामाजिक समरसता और पारस्परिक प्रेम का भी अनुपम संदेश देता है। इस दिन जाति, वर्ग, भाषा और सम्प्रदाय के सभी भेद मिट जाते हैं और सम्पूर्ण नगर भक्ति एवं सेवा के एक सूत्र में बंध जाता है। यही भारत की सनातन संस्कृति की वास्तविक शक्ति है।
स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे हनुमान जी के आदर्शों-चरित्रबल, अनुशासन, सेवा, निष्ठा और राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन में अपनाएँ। यदि मनुष्य अपने भीतर श्रद्धा, आत्मविश्वास और सेवा-भाव जागृत कर ले, तो उसका जीवन निश्चित रूप से सफल, शांतिपूर्ण और कल्याणकारी बन सकता है।
प्रवचन के उपरान्त स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने भगवान श्रीराम के भजन ‘इतनी विनती रघुनंदन से’की अत्यंत भावपूर्ण प्रस्तुति दी। भजन की मधुर स्वर-लहरियों से सम्पूर्ण मंदिर परिसर भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण से ओतप्रोत हो उठा तथा उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
कार्यक्रम का समापन समस्त उपस्थित भक्तगणों के मध्य प्रसाद वितरण के साथ किया गया।


